Edited By Radhika,Updated: 29 Jan, 2026 01:42 PM

पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस आलाकमान और शशि थरूर के बीच रिश्तों में आई खटास अब चर्चा का विषय बन गई है। थरूर के कुछ हालिया कदमों और बयानों ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया था, जिसके बाद भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल गया। हालांकि, खड़गे...
नेशनल डेस्क: पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस आलाकमान और शशि थरूर के बीच रिश्तों में आई खटास अब चर्चा का विषय बन गई है। थरूर के कुछ हालिया कदमों और बयानों ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया था, जिसके बाद भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल गया। हालांकि, खड़गे और राहुल गांधी के साथ हुई ताजा मुलाकात ने इन अटकलों को शांत करने की कोशिश की है।
थरुर और कांग्रेस के बीच तनाव की वजह
थरूर और कांग्रेस के बीच तनाव के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी घटनाएं मानी जा रही हैं:
1. भाजपा का निमंत्रण स्वीकार करना: रिश्तों में गिरावट तब शुरू हुई जब भाजपा सरकार ने थरूर को एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया। थरूर ने इसे स्वीकार कर लिया, जबकि कांग्रेस के किसी अन्य नेता को यह निमंत्रण नहीं दिया गया था। पार्टी को थरूर का सरकार के साथ जाना रास नहीं आया।
2. पीएम मोदी के भाषण का विश्लेषण: नवंबर में थरूर ने प्रधानमंत्री के एक संबोधन को सोशल मीडिया (X) पर "प्रगति के लिए बेचैन होने वाला सांस्कृतिक आह्वान" बताया था। इस पर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और संदीप दीक्षित ने तीखी प्रतिक्रिया दी और थरूर के रुख पर सवाल उठाए। थरूर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ भाषण का वर्णन किया था, उसकी तारीफ नहीं।
3. 'फैमिली बिजनेस' वाला लेख: विवाद तब और गहरा गया जब थरूर का एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था— 'इंडियन पॉलिटिक्स आर अ फैमिली बिजनेस'। इसमें परिवार आधारित पार्टियों की आलोचना की गई थी, जिसे सीधे तौर पर गांधी परिवार पर निशाना माना गया।
भाजपा ने किया तीखा हमला
इन घटनाओं के बाद भाजपा ने कांग्रेस के 'प्रथम परिवार' (गांधी परिवार) पर जमकर तंज कसे। भाजपा का कहना था कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है और थरूर जैसे स्वतंत्र विचार रखने वाले नेताओं को वहां दबाया जा रहा है।
थरूर का पक्ष
शशि थरूर ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि उनकी टिप्पणियां और कदम किसी व्यक्ति या परिवार के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की सेवा और राजनीति को बेहतर बनाने की इच्छा से प्रेरित होते हैं। खड़गे और राहुल गांधी के साथ हुई इस बैठक का उद्देश्य इन गलतफहमियों को दूर करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए एकजुट होना माना जा रहा है।