Edited By Parveen Kumar,Updated: 11 Feb, 2026 11:50 PM

सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को ‘शिव रात्रि’ मनाई जाती है और शिव पूजक इस दिन विशेष पूजा करते हैं, लेकिन फाल्गुन माह की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि की संज्ञा दी गयी है।
नेशनल डेस्क : सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को ‘शिव रात्रि’ मनाई जाती है और शिव पूजक इस दिन विशेष पूजा करते हैं, लेकिन फाल्गुन माह की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि की संज्ञा दी गयी है।
शिव अजन्में हैं अर्थात इनका जन्म किसी माता की गर्भ से न हुआ है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को देश भर के लोग महाशिवरात्रि को महान आध्यात्मिक उत्सव मनाते हैं, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इसी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। यह भी मान्यता है अग्निलिंग से इसी दिन सृष्टि का जन्म हुआ था। ईशान संहिता का सन्दर्भ देकर कुछ स्थानों पर संदर्भ मिलता है कि इसी तिथि में शिव अरबों-खरबों सूर्य का तेज लेकर लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे, जिसके बाद सृष्टि की उत्पत्ति हुई।
इसके साथ ही इस तिथि का सम्बन्ध शिव के नीलकंठ स्वरूप से भी है। लोक आख्यान के अनुसार समुद्र मंथन के बाद अमृत के साथ विष भी बाहर आया, जिसकी ब्रह्माण्ड को नष्ट कर देने की शक्ति थी, शिव ने वह विष पी लिया और अपने कंठ में ही रोक लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष के प्रभाव से बचने के लिए देवताओं ने रात भर शिव को जगाए रखा और इस अवधि में निरंतर नृत्य-संगीत चलता रहा। यही रात ‘महाशिवरात्रि’ कहलाई, जिसमें शिव के भक्त रात भर जागकर उनका भजन गाते हैं और भावविह्वल होकर नृत्य करते हैं।
वैसे लोक मानस में महाशिवरात्रि को शिव-पार्वती के विवाह से जोड़कर देखा जाता है। महासाधना है कि महाशिवरात्रि व्रत इस पर परंपरानुसार लोग व्रत और रात्रि जागरण करते हैं। एक श्लोक में कहा गया है- शिवरात्रिव्रतं नाम, सर्वपापप्रणाशनम्। आचाण्डालमनुष्याणां, भुक्तिमुक्तिप्रदायकम्।'
अर्थात, इस व्रत को कोई भी मनुष्य कर सकता है। श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करने से मनुष्य जन्म-मरण के बंधन तक से मुक्त हो जाता है, अर्थात उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
महाशिवरात्रि पर वास्तुशास्त्र के अनुसार क्या करे
- इस दिन उत्तर पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण की साफ सफाई करने से पॉजिटिव एनर्जी आती है और नेगेटिव एनर्जी दूर होती है । इस दिशा की साफ सफाई से धन , सुख समृद्धि आती है ।
- शिवलिंग पर अपराजिता के पुष्प चढ़ाए । इससे घर में धनसमृद्धि की वृद्धि होगी , परिवारिक सामंजस्य बढ़ेगा ।
- मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाए । इससे नेगेटिव एनर्जी दूर होती है ।और पॉजिटिव एनर्जी भीतर आती है ।
- महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करने से समस्त प्रकार के लाभ मिलते है और मनोकामना पूर्ण होती है।
- ऐसे व्यक्ति जिनका विवाह न हो रहा हो अथवा विवाह उपरांत संबंधों में कठिनाई हो उन्हें महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक कर गौरीशंकर रुद्राक्ष पहनना चाहिए। इससे वैवाहिक संबंध मधुर होगे ।
- यदि किसी को संतान बाधा है , गर्भ रुकता नहीं है अथवा गर्भ धारण करने में कठिनाई है तो उसे महाशिवरात्रि के दिन 108 बार ॐ नमः शिवाय के जप के साथ गर्भ गौरी रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए इससे भगवान शिव और पार्वती जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और संतान की प्राप्ति होती है ।
- वास्तुदोष निवारण के लिए घर में नंदी की मूर्ति या तस्वीर घर के भीतर की ओर करते हुए रखनी चाहिए।
- महाशिवरात्रि के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप सभी प्रकार की कठिनाइयों को दूर करता है और मनोकामना पूर्ण करता है। - राजीव आचार्य, ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री, अंतर्राष्ट्रीय सनातन धर्म परिषद उज्जैन