गर्दन पर छुरी भी रख दोगे तब भी नहीं गाएंगे…वंदे मातरम् पर AIMIM के दिल्ली अध्यक्ष का विवादित बयान

Edited By Updated: 12 Feb, 2026 06:10 AM

aimim delhi president s controversial statement on vande mataram

केंद्र सरकार ने बुधवार सुबह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर नए नियम जारी किए हैं, जिसके बाद देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

नेशनल डेस्कः केंद्र सरकार ने बुधवार सुबह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर नए नियम जारी किए हैं, जिसके बाद देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। गृह मंत्रालय के नए निर्देशों के अनुसार, अब सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य होगा।

नए नियमों में साफ कहा गया है कि जहां भी राष्ट्रगान बजाया जाएगा, उससे पहले वंदे मातरम् गाया या बजाया जाना चाहिए और इस दौरान सभी लोगों को खड़ा होना होगा।

कहां-कहां बजेगा वंदे मातरम्?

सरकार के निर्देशों के मुताबिक, वंदे मातरम् अब इन मौकों पर भी बजाया जाएगा —

साथ ही यह भी कहा गया है कि सिनेमा हॉल जैसी सार्वजनिक जगहों पर भी वंदे मातरम् बजाया जा सकता है, लेकिन वहां खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वंदे मातरम् के सभी छह छंद बजाए जाएंगे, जिनमें वे चार छंद भी शामिल हैं जिन्हें 1937 में कांग्रेस ने हटा दिया था।

बैंड और संगीत को लेकर क्या निर्देश?

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अगर बैंड द्वारा वंदे मातरम् बजाया जाता है, तो उससे पहले ड्रम बजाए जाएंगे, ताकि लोगों को पता चल सके कि राष्ट्रीय गीत बजने वाला है। यह तब तक लागू रहेगा जब तक कोई और विशेष संकेत न दिया गया हो।

स्कूलों में वंदे मातरम् अनिवार्य

सरकार ने यह भी कहा है कि सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गाकर की जा सकती है। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे —

  • राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को बढ़ावा दें

  • छात्रों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना बढ़ाएं

  • सांस्कृतिक और औपचारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को शामिल करें

ओवैसी की पार्टी का कड़ा विरोध

इस फैसले पर एआईएमआईएम (AIMIM) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और इंडिया मुस्लिम फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार पर हमला बोला। 

उन्होंने लिखा कि — वंदे मातरम् न तो राष्ट्रीयगान है, न ही यह संविधान का हिस्सा है। पहले लोग इसे अपनी आस्था और इच्छा से गाते थे लेकिन भाजपा और RSS ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा बना दिया। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा —“तुम हमारी गर्दन पर छुरी भी रख दोगे, तब भी हम वंदे मातरम् नहीं गाएंगे।”

सरकार का रुख क्या है?

केंद्र सरकार का कहना है कि वंदे मातरम् ऐतिहासिक रूप से भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था। सरकार का मानना है कि यह देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है और इसलिए इसे आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल किया गया है। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है और अलग-अलग दलों की अलग-अलग राय सामने आ रही है।

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