Edited By Radhika,Updated: 30 Jan, 2026 12:19 PM

बीते दिन SC ने UGC के नियमों पर रोक लगाई है। कोर्ट ने यह रोक उन नियमों पर लगाई है, जो परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लागू किए गए थे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि इन नियमों की भाषा में 'प्रथम दृष्टया...
UGC Regulations 2026: बीते दिन SC ने UGC के नियमों पर रोक लगाई है। कोर्ट ने यह रोक उन नियमों पर लगाई है, जो परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लागू किए गए थे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि इन नियमों की भाषा में 'प्रथम दृष्टया अस्पष्टता' है, जिससे समाज में बंटवारा होने और नियमों के दुरुपयोग का खतरा है।
कोर्ट ने क्यों लगाया स्टे?
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ये नियम देश की एकता को प्रभावित कर सकते हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब 2012 के नियम पहले से मौजूद थे, तो नए नियमों में 'जातिगत भेदभाव' को अलग से परिभाषित करने की क्या जरूरत थी? अदालत ने चिंता जताई कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में 'सेग्रीगेशन' (अलगाव) जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी।

राजनीतिक गलियारों में भी मची हलचल
1. बीजेपी: संविधान और सनातन की जीत बीजेपी नेताओं ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है।
- गिरिराज सिंह: "यह फैसला भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी है। पीएम मोदी ने हमेशा 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर काम किया है।"
- निशिकांत दुबे: "संविधान की धारा 14 और 15 ही सर्वोपरि है। मोदी सरकार ने हमेशा गरीबों की सुध ली है।"
- बृजभूषण शरण सिंह: "नए नियम एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर बनाए गए थे, कोर्ट ने एक बड़े टकराव को रोक लिया है।"

2. विपक्ष: बंटी हुई राय विपक्षी दलों में इस मुद्दे पर अलग-अलग सुर देखने को मिले।

अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। केंद्र सरकार और यूजीसी को 19 मार्च तक कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा कि इन नियमों को बनाने के पीछे उनका तर्क क्या है।