Edited By Sanjeev,Updated: 14 Oct, 2026 10:57 AM
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व डायरेक्टर और 69 वर्षीय रिटायर्ड साइंटिस्ट के साथ 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में कथित तौर पर 1.25 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई। इस मामले की जांच के दौरान कंबोडिया और...
नई दिल्ली : अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व डायरेक्टर और 69 वर्षीय रिटायर्ड साइंटिस्ट के साथ 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में कथित तौर पर 1.25 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई। इस मामले की जांच के दौरान कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में बैठे हैंडलर्स से जुड़े एक कथित इंटरनेशनल सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स (IFSO) यूनिट ने आंध्र प्रदेश के एक 79 वर्षीय व्यक्ति से जुड़े 'डिजिटल अरेस्ट' के एक अलग मामले में 7.25 करोड़ रुपए सुरक्षित किए और धोखाधड़ी की चल रही जांच से जुड़े बैंक खातों में 1.96 करोड़ रुपए को होल्ड पर रखा।
पुलिस ने बताया कि जांच तब शुरू हुई जब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व डायरेक्टर और रिटायर्ड साइंटिस्ट प्रदीप कुमार दास ने आरोप लगाया कि 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में उनके साथ 1.25 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई है। 14 अगस्त को उन्हें दिल्ली पुलिस, एंटी-टेररिज्म स्क्वाड और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के अधिकारी बनकर बात करने वाले लोगों का फोन आया। उन्होंने कथित तौर पर दावा किया कि मनी-लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनके आधार डिटेल्स का गलत इस्तेमाल हुआ है और उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी।
आरोपियों ने उनके फंड की जांच के बहाने कथित तौर पर उनके बैंक डिटेल्स हासिल किए और उन्हें RTGS के जरिए तीन बैंक खातों में 1,25,09,000 रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। पुलिस ने बताया कि उन्होंने कथित तौर पर उन्हें लगातार वीडियो सर्विलांस पर रखा और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई और पैसे के लेन-देन का पता लगाने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने के लिए जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि एक ग्रुप साइबर क्राइम में इस्तेमाल के लिए बैंक खातों का इंतजाम कर रहा था और M/s MR ट्रेडर्स के नाम से एक बैंक खाता चला रहा था। पुलिस ने द्वारका के सेक्टर 7 में रामफल चौक के पास एक जगह पर छापा मारा, जहां पांच लोग रह रहे थे। आरोपियों की पहचान मोहम्मद महफूजर रहमान (41), इजहार आलम (34), अल्ताफ हुसैन (45), इंतखाब (27) और अनीश खान (31) के तौर पर हुई है। वे कथित तौर पर साइबर फ्रॉड ट्रांजैक्शन के लिए बैंक अकाउंट चला रहे थे।
जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में टेलीग्राम चैट और "SMS टूल्स" नाम का एक संदिग्ध ऐप मिला। जांचकर्ताओं को शक है कि इस ऐप को इस तरह सेट किया गया था कि यह अपने-आप SMS मैसेज (वन-टाइम पासवर्ड या OTP समेत) को विदेश से साइबर क्राइम करने वाले लोगों तक फॉरवर्ड कर दे। अनीश खान कथित तौर पर मुख्य हैंडलर था; वह टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे साथियों से तालमेल बिठाता था और ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक अकाउंट को मैनेज करता था। पुलिस के मुताबिक, उसे USDT (एक क्रिप्टोकरेंसी) में 5.5% कमीशन मिलता था, जिसे क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय रुपयों में बदला जाता था।
इजहार आलम ने कथित तौर पर अकाउंट होल्डर का परिचय अल्ताफ हुसैन से कराया था, जिसने टेलीग्राम के जरिए 'म्यूल' बैंक अकाउंट (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले अकाउंट) का इंतजाम किया था। जांचकर्ताओं ने बताया कि इंतखाब ने दिल्ली में ग्रुप के आने-जाने और रहने का इंतजाम किया और उनके रहने के दौरान अकाउंट होल्डर पर नजर रखी। पुलिस ने बताया कि दास से जुड़े मामले में छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान नीरज कुमार मित्तल, कंवर पाल, सैफ अली खान, रणबीर, प्रभात राय उर्फ आशुतोष और अनिल सागू उर्फ कृष्णा के तौर पर हुई। आरोपियों ने कथित तौर पर बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने, ट्रांजैक्शन में मदद करने और कमीशन इकट्ठा करने व बांटने में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
इस जांच से पुलिस को आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दर्ज साइबर फ्रॉड के मामलों से जुड़े लिंक का पता लगाने में भी मदद मिली है।विजयवाड़ा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले में 79 साल के बोप्पना बापा राव के साथ कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के जरिए 10.25 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई। आंध्र प्रदेश पुलिस के साथ तुरंत तालमेल बिठाकर और कार्रवाई करके, ठगी गई रकम में से 7.25 करोड़ रुपए सुरक्षित या फ्रीज कर लिए गए।
पश्चिम बंगाल के पुरबा मेदिनीपुर जिले में दर्ज एक और मामले में एक शिकायतकर्ता के साथ निवेश पर ज्यादा रिटर्न का झूठा वादा करके कथित तौर पर 21 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने बताया कि पूरी रकम M/s MR Traders के नाम वाले बैंक खाते में जमा की गई थी। खाता फ्रीज होने से पहले ही लगभग 5 लाख रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए थे, जिसके बाद डायवर्ट किए गए फंड का पता लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई।
आरोपियों का संबंध दिल्ली पुलिस द्वारा जून में दर्ज किए गए एक अलग 'डिजिटल अरेस्ट' मामले से भी है, जिसमें एक शिकायतकर्ता के साथ कथित तौर पर 77 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई थी। मामले की आगे की जांच चल रही है। पुलिस ने छह मोबाइल फोन जब्त किए हैं जिनमें चैट, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूत मौजूद हैं; साथ ही जांच के दायरे में आए बैंक खाते से जुड़ी एक चेकबुक भी जब्त की गई है।
जांचकर्ताओं ने 7 ऐसे ऑनलाइन चैनलों की पहचान की है जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) की खरीद-फरोख्त के लिए किया जाता था। चैट और अन्य डिजिटल सबूतों के विश्लेषण से पता चला है कि इनका संबंध अलग-अलग राज्यों में 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' पर दर्ज 78 शिकायतों से है। अधिकारियों ने बताया कि इसमें कुल 73 करोड़ रुपए शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पैसे के लेन-देन का पता लगाने, सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने और विदेश में बैठे हैंडलर्स की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।