हौसले को सलाम: न रोशनी, न आवाज़... फिर भी रचा इतिहास, सारा मोइन ने 12वीं में हासिल किए 98.75% अंक

Edited By Updated: 04 May, 2026 12:09 PM

sara moin who is blind or deaf scored 98 75 in class 12

कहते हैं कि अगर आपके इरादे फौलादी हों, तो कोई भी मुश्किल आपको सफलता हासिल करने से रोक नहीं सकती है। इसी बात को लखनऊ की 19 साल की सारा मोइन ने सच कर दिखाया है। सारा पूरी तरह से अपनी आंखों की रोशनी और सुनने की क्षमता पूरी तरह खो चुकी है, फिर भी उसने...

नेशनल डेस्क: कहते हैं कि अगर आपके इरादे फौलादी हों, तो कोई भी मुश्किल आपको सफलता हासिल करने से रोक नहीं सकती है। इसी बात को लखनऊ की 19 साल की सारा मोइन ने सच कर दिखाया है। सारा पूरी तरह से अपनी आंखों की रोशनी और सुनने की क्षमता पूरी तरह खो चुकी है, फिर भी उसने ISC (12वीं) बोर्ड परीक्षा में 98.75 % अंक हासिल कर पूरे क्राइस्ट चर्च कॉलेज में टॉप किया है। सारा आज लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनी हैं।

बचपन की उस बीमारी ने सब छीन लिया

दरअसल सारा 4 साल की उम्र तक एक आम बच्चे की तरह ही जीवन जीती थीं। फिर उन्हें 'सारकॉइडोसिस' (Sarcoidosis) नाम की एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी ने घेर लिया। इस बीमारी में धीरे- धीरे सारा की आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद उसे सुनने और बोलने में भी मुश्किल होने लगी। लेकिन सारा ने इन अंधेरों के बीच भी अपनी शिक्षा की लौ को बुझने नहीं दिया।

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पिता ने किया नौकरी का बलिदान

सारा की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके पिता, मोइन अहमद का अटूट संघर्ष है। अपनी बेटी के सपनों को पंख देने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी तक छोड़ दी। वे सारा को हर दिन स्कूल लेकर जाते और पढ़ाई में उसकी मदद करते थे।  क्राइस्ट चर्च कॉलेज ने भी सारा के लिए विशेष प्रबंध किए, जहाँ विशेष शिक्षकों ने उन्हें 'ऑर्बिट रीडर' जैसे आधुनिक ब्रेल उपकरणों और डिजिटल तकनीक के माध्यम से पढ़ाया।

ऐसे पूरी की सारा ने अपनी पढ़ाई

चूंकि सारा देख और सुन नहीं सकती थीं, इसलिए उनके लिए पढ़ाई का तरीका बिल्कुल अलग था। किताबों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में बदला गया, जिसे सारा स्पर्श (Touch) के जरिए पढ़ती थीं। बोर्ड परीक्षा में उनके लिए प्रश्नपत्र ब्रेल लिपि में तैयार किए गए और उनके जवाबों को टेक्स्ट में बदला गया।

लखनऊ की 'हेलेन केलर'

सारा की इस अद्भुत प्रतिभा और संघर्ष को देखते हुए उनके शिक्षक उन्हें सम्मान से 'हेलेन केलर' कहकर पुकारते हैं। स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि सारा की उपलब्धि केवल अंकों की संख्या नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि सीमाएं शरीर में होती हैं, इंसानी सपनों में नहीं।

 

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