ईरान की ट्रंप को सीधी धमकी-होर्मुज को बना देंगे अमेरिकी सेना की “कब्रगाह”, F-15E जेट से भी ज्यादा बुरा होगा अंजाम

Edited By Updated: 04 May, 2026 11:52 AM

mohsen rezaei warned hormuz could become a graveyard for us military

मोहसेन रेजई ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिकी सेना की “कब्रगाह” बन सकती है। डोनाल्ड ट्रंप ने जवाब में कड़ी कार्रवाई की धमकी दी। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है, जबकि 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर भी बातचीत जारी है।

International Desk: होर्मुज़ जलडमरूमध्य अब केवल एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक तनाव का केंद्र बन चुका है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब खुली धमकियों तक पहुंच गया है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारी  मोहसिन रेजई (Mohsen Rezaei) ने साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर नाके बंदी न हटाई गई तो होर्मुज  को अमेरिकी सेना की “कब्रगाह” बना देंगे । उन्होंने अमेरिका को “समुद्री लुटेरा” बताते हुए कहा कि उसके जहाजों का अंजाम भी वही होगा जो हाल ही में एक अमेरिकी फाइटर जेट का हुआ था। रजाई ने इस्फहान में अमेरिकी F-15E जेट गिराए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर टकराव बढ़ा, तो समुद्र में भी वही तस्वीर दिखाई दे सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

 

दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने कोई “गलती” की, तो अमेरिका फिर से हमला करेगा। ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत होर्मुज़ में फंसे जहाजों को निकालने की तैयारी कर रहा है। इस बीच, क्षेत्र में डर का माहौल साफ दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की चेतावनी के बाद पर्शियन गल्फ में कई जहाजों को अपनी एंकरिंग छोड़कर वहां से हटने के निर्देश दिए गए। यूएई के पास रास अल खैमाह (Ras Al Khaimah) के आसपास जहाजों को रेडियो मैसेज के जरिए अलर्ट किया गया, जिसके बाद कई जहाज सुरक्षित जगहों की ओर बढ़ने लगे। समुद्र में हमले भी जारी हैं। हाल ही में यूनाइटेड किंगडम समुद्री व्यापार संचालन (United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने पुष्टि की कि एक टैंकर को अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाया गया।

 

इससे पहले एक कार्गो जहाज पर छोटे नावों से हमला हुआ था। लगातार हमलों से समुद्री सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसी बीच, अमेरिका ने दावा किया है कि उसके दबाव के कारण अब तक दर्जनों जहाजों ने ईरान के बंदरगाहों से अपना रास्ता बदल लिया है। इससे साफ है कि समुद्री व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है।हालात इतने गंभीर हैं कि तेल बाजार भी प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुवैत ने अप्रैल में कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया जो 35 साल में पहली बार हुआ है। इसका एक बड़ा कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना है। कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां जारी हैं।

 

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान ने अमेरिका को 14-पॉइंट प्रस्ताव भेजा है। इसमें 30 दिनों के भीतर समाधान, अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंध हटाने और युद्ध के मुआवजे जैसी मांगें शामिल हैं। इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि पहले Strait of Hormuz को खोला जाए और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाए। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत हो सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि समझौते में सबसे बड़ी बाधा दोनों देशों का “अहंकार” है। एक तरफ अमेरिका पूरी जीत चाहता है, वहीं ईरान झुकने को तैयार नहीं है।

  

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