Edited By Ramanjot,Updated: 27 Jan, 2026 06:19 PM

बिहार के बांका जिले में गणतंत्र दिवस के मौके पर एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। 26 जनवरी 2026 को राजौन प्रखंड के एक सरकारी मध्य विद्यालय में झंडोतोलन के कुछ देर बाद ही झंडे के पोल से अचानक एक जहरीला सांप निकल आया।
नेशनल डेस्क: बिहार के बांका जिले में गणतंत्र दिवस के मौके पर एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। 26 जनवरी 2026 को राजौन प्रखंड के एक सरकारी मध्य विद्यालय में झंडोतोलन के कुछ देर बाद ही झंडे के पोल से अचानक एक जहरीला सांप निकल आया। इस अप्रत्याशित घटना से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर लोग नाराजगी जता रहे हैं।
झंडोतोलन के बाद अचानक निकला सांप, मच गया हड़कंप
यह मामला चिलकावर-असौता पंचायत स्थित मध्य विद्यालय असौता का है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्कूल में पारंपरिक तरीके से तिरंगा फहराया गया। कार्यक्रम के बाद प्रसाद वितरण हुआ और अधिकतर शिक्षक स्कूल से रवाना हो गए, जबकि कुछ बच्चे परिसर में ही मौजूद थे। इसी दौरान झंडे के पोल के ऊपरी हिस्से से एक सांप निकलता दिखाई दिया। बच्चों ने जब शोर मचाया तो आसपास के ग्रामीण भी तुरंत मौके पर पहुंच गए।
डर के माहौल में गिरा झंडा, प्रोटोकॉल उल्लंघन पर उठे सवाल
सांप को देखकर घबराए लोगों ने जल्दबाजी में झंडे के पोल को नीचे गिरा दिया और लाठी-डंडों से उस पर हमला कर दिया। इसी अफरा-तफरी के बीच राष्ट्रीय ध्वज जमीन पर गिर गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सांप को मारने की कोशिश में तिरंगे का सम्मान बनाए नहीं रखा जा सका, जिसे लेकर ध्वज प्रोटोकॉल के उल्लंघन के सवाल उठ रहे हैं। बाद में ग्रामीणों ने सांप को मार दिया और लोहे के सहारे झंडे को दोबारा खड़ा किया।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। कई यूजर्स ने इसे राष्ट्रीय ध्वज के प्रति लापरवाही बताया और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। स्थानीय लोगों का कहना है कि झंडोतोलन से पहले बांस या लोहे के पोल की पूरी तरह जांच और सफाई जरूरी होती है, क्योंकि इनमें सांप जैसे जीव छिप सकते हैं। अगर पहले सावधानी बरती जाती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान में लापरवाही नहीं होनी चाहिए
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि राष्ट्रीय पर्वों के दौरान केवल आयोजन ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी जिम्मेदारियां भी उतनी ही अहम होती हैं। तिरंगे के सम्मान से जुड़ी किसी भी तरह की चूक लोगों की भावनाओं को आहत कर सकती है।