Space Without Suit : अंतरिक्ष में बिना स्पेस सूट कितनी देर जिंदा रह सकता है इंसान? जानकर रह जाएंगे हैरान

Edited By Updated: 23 Jun, 2026 01:56 PM

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Life on Space: अंतरिक्ष की दुनिया जितनी रहस्यमयी और रोमांचक दिखाई देती है, उतनी ही खतरनाक भी है। फिल्मों में अक्सर अंतरिक्ष यात्रियों को खुले अंतरिक्ष में काम करते हुए देखा जाता है, लेकिन ये हकीकत से कई गुणा परे है। अगर कोई इंसान बिना स्पेस सूट के...

Life on Space: अंतरिक्ष की दुनिया जितनी रहस्यमयी और रोमांचक दिखाई देती है, उतनी ही खतरनाक भी है। फिल्मों में अक्सर अंतरिक्ष यात्रियों को खुले अंतरिक्ष में काम करते हुए देखा जाता है, लेकिन ये हकीकत से कई गुणा परे है। अगर कोई इंसान बिना स्पेस सूट के अंतरिक्ष में पहुंच जाए तो उसके साथ क्या होगा?  क्या वह तुरंत मर जाएगा या कुछ समय तक जीवित रह सकता है? आइए जानते हैं कि ऐसी स्थिति में शरीर के साथ क्या-क्या होता है और मौत कितनी देर में हो सकती है।

सबसे बड़ा खतरा ऑक्सीजन की कमी
पृथ्वी पर हमारा शरीर हवा और वायुमंडलीय दबाव के अनुसार काम करता है। लेकिन अंतरिक्ष में न तो सांस लेने लायक ऑक्सीजन होती है और न ही वायुमंडलीय दबाव। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना सुरक्षा के अंतरिक्ष के संपर्क में आता है, उसके शरीर को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। खून में मौजूद बची हुई ऑक्सीजन कुछ सेकंड तक दिमाग को सक्रिय रख सकती है, लेकिन करीब 10 से 15 सेकंड के भीतर व्यक्ति बेहोश होने लगता है।

सांस रोकना बन सकता है जानलेवा
ऐसी स्थिति में यदि कोई व्यक्ति घबराकर अपनी सांस रोक लेता है तो खतरा और बढ़ सकता है। अंतरिक्ष में दबाव न होने के कारण फेफड़ों के अंदर मौजूद हवा तेजी से फैलती है। इससे फेफड़ों के ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थिति में सांस रोकने के बजाय हवा बाहर निकालना अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।

शरीर में सूजन आने लगती है
अंतरिक्ष का वैक्यूम शरीर पर एक और बड़ा असर डालता है। दबाव की कमी के कारण शरीर के ऊतकों में मौजूद तरल पदार्थ गैस बनने लगते हैं। इससे शरीर के कई हिस्सों में सूजन दिखाई दे सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर फट जाएगा, लेकिन Skin और tissues पर इसका स्पष्ट प्रभाव पड़ सकता है।

आंखों और मुंह की नमी पर भी पड़ता है असर
अंतरिक्ष के निर्वात वातावरण में शरीर की सतह पर मौजूद नमी तेजी से प्रभावित होती है। आंखों की नमी, मुंह की लार और अन्य तरल पदार्थों पर दबाव की कमी का असर दिखाई देता है, जिससे शरीर को गंभीर असुविधा हो सकती है।

रेडिएशन और तापमान भी बनते हैं खतरा
अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा सुरक्षा कवच मौजूद नहीं होता। ऐसे में सूरज से आने वाली तीव्र अल्ट्रावायलेट किरणें सीधे शरीर तक पहुंच सकती हैं। इससे त्वचा को गंभीर नुकसान हो सकता है। वहीं अंतरिक्ष के कुछ हिस्से अत्यधिक गर्म और कुछ बेहद ठंडे हो सकते हैं। हालांकि शरीर तुरंत बर्फ की तरह नहीं जमता, क्योंकि वैक्यूम में तापमान का प्रभाव पृथ्वी की तुलना में अलग तरीके से पड़ता है।

कितनी देर तक जीवित रह सकता है इंसान?
वैज्ञानिकों के अनुसार बिना ऑक्सीजन और दबाव के इंसानी शरीर ज्यादा देर तक काम नहीं कर सकता। कुछ ही सेकंड में बेहोशी आने लगती है और यदि तुरंत बचाव न मिले तो एक से दो मिनट के भीतर शरीर के अहम अंग काम करना बंद कर सकते हैं। अंतरिक्ष इंसानों के लिए स्वाभाविक रूप से रहने योग्य जगह नहीं है। यही कारण है कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए Special space suit और Life-support systems विकसित की गई हैं। बिना स्पेस सूट अंतरिक्ष में पहुंचना कुछ ही क्षणों में जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि वहां ऑक्सीजन, दबाव और सुरक्षा का पूरी तरह अभाव होता है।

 

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