Edited By Tanuja,Updated: 21 Jun, 2026 02:19 PM

होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने के बाद भारत के तीन झंडाधारी तेल टैंकर 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लेकर भारत की ओर रवाना हो गए हैं। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। केंद्र सरकार ने इसे समुद्री हितों की सुरक्षा...
International Desk: पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों पर पड़े असर के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। भारत के झंडे वाले तीन बड़े कच्चा तेल टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर रवाना हो गए हैं। ये जहाज 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लेकर आ रहे हैं, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बल मिला है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal) ने सोशल मीडिया मंच X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि 'देश वैभव', 'देश विभोर' और 'सनमार हेराल्ड' नामक तीन भारतीय टैंकरों ने सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया है। इन जहाजों पर कुल 94 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार हैं। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार देश के समुद्री हितों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियां भारतीय नाविकों और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार समन्वय कर रही हैं।
कब पहुंचेंगे भारत?
- अधिकारियों के अनुसार तीनों जहाज अलग-अलग भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेंगे
- देश वैभव 24 जून को Vadinar Port पहुंचने की संभावना।
- देश विभोर 24 जून को Sikka Port पहुंच सकता है।
- सनमार हेराल्ड 20 जून को होर्मुज पार करने के बाद 1 जुलाई को Paradip Port पहुंचने की उम्मीद।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और पश्चिम एशिया से आने वाला अधिकांश कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आता है। इसलिए इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है। तीनों टैंकरों का सुरक्षित पारगमन यह संकेत देता है कि क्षेत्र में हालात पहले की तुलना में स्थिर हो रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला भी सामान्य होने लगी है।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद खुला रास्ता
रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून को अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियां हटाने का फैसला किया था। इसके बाद तेल टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू हुई। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और Iran के बीच हुए एक समझौते की भी चर्चा रही, जिसके बाद क्षेत्रीय तनाव कम होने और तेल निर्यात मार्गों के खुलने का रास्ता बना।
भारत की ऊर्जा लाइफलाइन सुरक्षित
विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीन टैंकरों का सुरक्षित भारत पहुंचना केवल तेल आपूर्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा, कूटनीतिक समन्वय और ऊर्जा रणनीति की सफलता का भी प्रतीक है। ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अनिश्चितताओं से जूझ रहा है, यह घटनाक्रम भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।