हैरान कर देगा यह मेडिकल सच: Coma में पड़े शख्स से ऐसे लिया जाता है स्पर्म, जानें कितना आता है खर्च

Edited By Updated: 16 Apr, 2026 11:54 AM

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How Sperm Retrieval Coma Patient: एक महिला, जिसके पति एक साल से अधिक समय से कोमा में हैं। ऐसे में पत्नी ने मां बनने की इच्छा जाहिर करते हुए गर्भधारण करने की अनुमति के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनके पति मार्च 2026 से ICU में भर्ती...

How Sperm Retrieval Coma Patient: एक महिला, जिसके पति एक साल से अधिक समय से कोमा में हैं। ऐसे में पत्नी ने मां बनने की इच्छा जाहिर करते हुए गर्भधारण करने की अनुमति के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनके पति मार्च 2026 से ICU में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक है। पति अभी भी Life Support Equipment पर हैं, इसलिए उनकी पत्नी ने अदालत से उनके Sperm का उपयोग करके भविष्य में मां बनने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। याचिकाकर्ता के वकील अरजीत गौर ने बताया कि महिला Sperm के Sample को सुरक्षित रखने की अनुमति मांग रही है।

Sperm Retrieval का साइंस
इस अनुरोध पर विचार करने के लिए, याचिकाकर्ता ने एक विशेषज्ञ चिकित्सा बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव दिया है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि पति की Current Medical Condition को देखते हुए sperm sample निकालना और सुरक्षित रखना संभव और सुरक्षित है या नहीं।

कैसे काम करता है सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल 
-स्पर्म को दो तरीक से निकाले जाते है जिसमें  पहला है PESA (Percutaneous Epididymal Sperm Aspiration), इस process में एक बहुत महीन सुई के जरिए 'epididymis' (अंडकोष के ऊपर की नली) से शुक्राणु खींचे जाते हैं। 

-दूसरा TESA (Testicular Sperm Aspiration) है जिसमें डॉक्टर एनेस्थीसिया देकर सीधे अंडकोष के ऊतकों (Tissues) से सुई डालकर शुक्राणु निकाल लेते हैं।

एक IVF विशेषज्ञ के अनुसार, इस प्रक्रिया को Surgical Sperm Collection या Surgical Sperm Extraction के रूप में जाना जाता है, जिसमें एक महीन सुई का उपयोग करके अंडकोष से शुक्राणु निकाले जाते हैं। शुक्राणु को गर्भनाल नलिकाओं से निकाला जाता है और बाद में प्रयोगशाला में -196 डिग्री सेल्सियस तापमान पर जमा दिया जाता है।  इन जमे हुए शुक्राणुओं को पिघलाकर गर्भधारण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि शुक्राणु को छोटी शीशियों में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, IVF में अक्सर कई प्रयास करने पड़ते हैं, इसलिए long term protection आवश्यक हो जाता है। IVF विशेषज्ञ के अनुसार, किसी मरीज का कोमा में होना जरूरी नहीं है कि उसके शुक्राणु की गुणवत्ता प्रभावित हो गई हो।

कितना आता है खर्च?
भारत में सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल की लागत की बात करें तो आमतौर पर PESA या TESA जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं का खर्च 25,000 रुपये- 50,000 रुपये के बीच आता है। यदि मामला जटिल हो और 'Micro-TESE' जैसी उन्नत तकनीक की आवश्यकता पड़े, जिसमें microscope का उपयोग होता है, तो यह खर्च 1.2 लाख रुपये से अधिक तक जा सकता है। इसमें सर्जन की फीस, अस्पताल का चार्ज और एनेस्थीसिया का खर्च बीच में शामिल होता है।

कानूनी बाधाएं और पति-पत्नी की सहमति
हालांकि शुक्राणु को एक दशक या उससे अधिक समय तक संरक्षित किया जा सकता है, यह प्रक्रिया कानूनी नियमों द्वारा सख्ती से नियंत्रित होती है। पति/पत्नी की सहमति से संबंधित वर्तमान कानून इस मामले में एक महत्वपूर्ण बाधा हैं। 2021 में स्थापित नियमों के अनुसार, शुक्राणु के उपयोग के लिए पति और पत्नी दोनों की आपसी सहमति आवश्यक है।
 

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