Edited By Tanuja,Updated: 11 Apr, 2026 04:20 PM

पूर्व राजनयिक केपी फेबियन ने अमेरिका-ईरान वार्ता पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इजराइल का प्रभाव अमेरिका पर हावी है। उन्होंने “tail wags the dog” कहकर संबंधों पर सवाल उठाए। तेल कीमतों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट को वार्ता की असली वजह बताया गया है।
International Desk: नई दिल्ली में पूर्व भारतीय राजनयिक केपी फेबियन ने इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में इजराइल और अमेरिका के रिश्ते सबसे बड़ी बाधा बन सकते हैं। फेबियन ने कहा कि कई बार ऐसा लगता है कि इस रिश्ते में “tail wags the dog” यानी छोटा पक्ष (इजराइल) बड़े पक्ष (अमेरिका) को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने इशारा किया कि बेंजामिन नेतन्याहू का असर डोनाल्ड ट्रंप पर काफी ज्यादा है।उनका मानना है कि 28 फरवरी को हुए हमलों के पीछे भी यही प्रभाव एक कारण हो सकता है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ा।
हालांकि अब ट्रंप पर बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक लागत का दबाव है, इसलिए वे बातचीत के लिए मजबूर हुए हैं। फेबियन ने यह भी कहा कि दोनों देश अमेरिका और ईरान वार्ता सफल चाहते हैं, लेकिन उनके कारण अलग-अलग हैं। अमेरिका पर तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव है, जबकि ईरान पहले से कमजोर स्थिति में है।उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खास जिक्र करते हुए कहा कि यही असली मुद्दा है, क्योंकि यहां से गुजरने वाली तेल सप्लाई प्रभावित होने से वैश्विक कीमतें बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर अमेरिका की राजनीति पर भी पड़ रहा है।फेबियन ने अमेरिकी टीम की आलोचना भी की।
उन्होंने कहा कि जेरेड कुशनेर और स्टीव विटकॉफ जैसे लोगों के पास जटिल परमाणु समझौतों की तकनीकी समझ कम है, जबकि अनुभवी विदेश विभाग के अधिकारी शामिल नहीं हैं। हालांकि उन्होंने जे डी वेंस को इस टीम में बेहतर विकल्प बताया और कहा कि उनकी भूमिका पहले की तुलना में सुधार ला सकती है।फेबियन के अनुसार, यह वार्ता “मेक या ब्रेक” जरूर है, लेकिन इसके सफल होने की संभावना सीमित है। अमेरिका-इजराइल संबंध, तेल संकट और कमजोर कूटनीतिक तैयारी ये सभी कारक इस शांति प्रयास को मुश्किल बना रहे हैं।