Edited By Tanuja,Updated: 20 May, 2026 02:24 PM

नॉर्वे के अखबार ने नरेंद्र मोदी को “स्नेक चार्मर” दिखाने वाला कार्टून प्रकाशित किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया। कई लोगों ने इसे नस्लवादी और औपनिवेशिक मानसिकता वाला बताया, जबकि कुछ ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और राजनीतिक व्यंग्य का...
International Desk: नॉर्वे के प्रमुख अखबार आफ़्टेनपोस्टेन (Aftenposten) द्वारा प्रकाशित एक कार्टून को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्टून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को “स्नेक चार्मर” यानी सपेरा दिखाया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसे नस्लवादी और अपमानजनक बताया जाने लगा। कार्टून में मोदी को पारंपरिक ‘पुंगी’ बजाते हुए दिखाया गया था, जबकि सामने पेट्रोल पंप की नोजल के आकार का सांप नजर आ रहा था। इसे हालिया पेट्रोल-डीजल कीमतों के संदर्भ से जोड़ा गया। यह चित्र एक राय लेख के साथ प्रकाशित हुआ, जिसका अनुवादित शीर्षक था “एक चतुर और थोड़ा परेशान करने वाला व्यक्ति।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई लोगों ने इस कार्टून की आलोचना करते हुए कहा कि यह भारत और भारतीयों के खिलाफ पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है। कुछ यूजर्स ने कहा कि दुनिया अब भी भारत को “सपेरों का देश” दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि भारत आज तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में बड़ी ताकत बन चुका है। यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के Madison Square Garden में दिए भाषण में कहा था कि दुनिया भारत को कभी “snake charmers” के देश के रूप में देखती थी, लेकिन अब भारत “mouse charmers” यानी तकनीकी विशेषज्ञों का देश बन चुका है।
हालांकि कुछ लोगों ने इस विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की आलोचना भी की। उनका कहना है कि राजनीतिक कार्टून लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा होते हैं और मीडिया का काम सरकारों पर सवाल उठाना है। यह मामला हाल ही में नॉर्वे की पत्रकार Helle Lyng और भारतीय अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद सामने आया है। पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने की कोशिश की थी, जिसके बाद विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी Sibi George ने भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का बचाव किया था। सिबी जॉर्ज ने कहा था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और कुछ विदेशी रिपोर्टों के आधार पर भारत को समझना गलत होगा। उन्होंने भारत के संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं का भी उल्लेख किया।