Edited By Tanuja,Updated: 20 May, 2026 12:15 PM

Israel की सेना ने गाजा की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ के सभी जहाजों को रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने बल प्रयोग और हिरासत के आरोप लगाए, जबकि इजराइल ने इसे “उकसावे की कार्रवाई” बताया। कई देशों ने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और...
International Desk: इजराइल की सेना ने मंगलवार को उन सभी जहाजों को रोक दिया, जो एक अंतरराष्ट्रीय बेड़े (फ्लोटिला) के तहत गाजा की नाकेबंदी को चुनौती देने की कोशिश कर रहे थे। यह अभियान गाजा में रह रहे लगभग 20 लाख फलस्तीनियों की बदहाल स्थिति और भोजन, दवाइयों तथा आवास की भारी कमी की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए चलाया जा रहा था। 'ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला' की वेबसाइट पर एक वीडियो में सशस्त्र इजराइली सैनिकों को जहाजों पर चढ़ते और कार्यकर्ताओं को हाथ ऊपर उठाते देखा गया। फ्लोटिला के आयोजकों का दावा है कि इजराइली बलों ने पांच नौकाओं पर कार्रवाई के दौरान रबड़ की गोलियां चलाईं और कुछ नौकाओं को नुकसान भी पहुंचा।
इसके बाद इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने इजराइल द्वारा बल प्रयोग की तत्काल समीक्षा करने का आह्वान किया। हालांकि इजराइल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कोई वास्तविक गोलीबारी नहीं हुई और केवल ''गैर-घातक उपाय'' चेतावनी के तौर पर अपनाए गए। इस फ्लोटिला की वेबसाइट के अनुसार, इजराइली सेना ने गाजा तटरेखा से लगभग 268 किलोमीटर दूर इस बेड़े को रोकना शुरू कर दिया था। ये नौकाएं पिछले सप्ताह तुर्किये से रवाना हुई थीं। इजराइल ने नौकाओं के इस बेड़े को ''केवल उकसावे के लिए की गई कार्रवाई'' बताया है, जिसका गाजा को सहायता पहुंचाने का कोई वास्तविक इरादा नहीं है। नौकाओं में प्रतीकात्मक मात्रा में सहायता सामग्री है।
सोमवार को इजराइली नौसेना ने साइप्रस के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में करीब 41 नौकाओं को रोककर उन पर सवार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था। फ्लोटिला के अनुसार 40 से अधिक देशों के 428 कार्यकर्ता अब तक ''लापता'' हैं क्योंकि उन्हें वकीलों या दूतावासों से संपर्क की अनुमति नहीं दी गई है। तुर्किये और हमास ने इस कार्रवाई को ''समुद्री डकैती'' बताया है। वहीं इटली, स्पेन और इंडोनेशिया ने इजराइल से कार्यकर्ताओं की रिहाई और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इजराइल 2007 से गाजा तटरेखा की नाकेबंदी कर रहा है। इजराइल का कहना है कि यह कदम हमास को हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जरूरी है, जबकि आलोचक इसे सामूहिक सजा बताते हैं।