Edited By Ramkesh,Updated: 15 Sep, 2026 03:03 PM

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भविष्य की लड़ाई में रणनीतिक बढ़त प्रौद्योगिकी नेतृत्व से तय होगी और ''आज की हमारी कल्पना ही कल की सैन्य क्षमता बनेगी''। सिंह ने यहाँ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक कार्यक्रम को संबोधित...
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भविष्य की लड़ाई में रणनीतिक बढ़त प्रौद्योगिकी नेतृत्व से तय होगी और ''आज की हमारी कल्पना ही कल की सैन्य क्षमता बनेगी''। सिंह ने यहाँ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' का 'विजन' केवल आर्थिक रूप से मज़बूत भारत बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि एक ऐसा भारत बनाने के बारे में है जो ''प्रौद्योगिकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित'' हो। सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र इस 'विजन' की "आधारशिला" है।
उन्होंने कहा, ''2047 तक हमें अहम प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करनी है, घरेलू सामान के इस्तेमाल में बड़ी बढ़ोतरी करनी है, रक्षा निर्यात में कई गुना वृद्धि करनी है और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की मज़बूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि सहयोग के बिना यह सब हासिल नहीं किया जा सकता और इस क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर साझेदारी होनी चाहिए। डीआरडीओ-उद्योग समन्वय बैठक -- 'विमर्श 2026' -- का आयोजन यहाँ डीआरडीओ भवन में किया गया। सिंह ने कहा कि डीआरडीओ और उद्योग के बीच साझेदारी केवल उत्पादन तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे अनुसंधान, डिज़ाइन, परीक्षण, प्रमाणन और पूरी विनिर्माण मूल्य शृंखला तक बढ़ाया जाना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य की लड़ाई में नयी प्रौद्योगिकियां, खासकर कृत्रिम मेधा (एआई) और ड्रोन, अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी नवाचार में तेज़ी लाने का आग्रह किया। सिंह ने कहा, ''आज हम देख रहे हैं कि एआई का इस्तेमाल करके ऐसी तस्वीर बनाई जा सकती है जो 80 के दशक की लगती है (ऑनलाइन वायरल हो रहे 80 के दशक संबंधी एआई ट्रेंड के संदर्भ में)। असली खुशी तब होगी जब आप 40-50 साल बाद के भविष्य की कोई तस्वीर दिखा पाएंगे।'' उन्होंने भारतीय रक्षा क्षेत्र के हितधारकों से उस दिशा में काम करने का आग्रह किया।
रक्षा मंत्री ने कहा, ''हम 40-50 साल बाद भारत को कैसा देखना चाहते हैं, यह कल्पना ही हमारे उत्साह को नयी ऊर्जा देगी।'' सिंह ने कहा कि नयी और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में निवेश करने वाली कंपनियाँ भविष्य में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्वकर्ता के तौर पर उभरेंगी। उन्होंने कहा, ''हमें न केवल भविष्य की प्रौद्योगिकी के बारे में सोचना है, बल्कि उसे विकसित भी करना है। क्योंकि भविष्य की लड़ाई में वही देश रणनीतिक बढ़त हासिल कर पाएगा जो प्रौद्योगिकी के मामले में आगे होगा। और आज की हमारी कल्पना ही कल की सैन्य क्षमता बनेगी।'' कार्यक्रम में डीआरडीओ के कई वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग की कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।