Edited By Ramkesh,Updated: 08 Sep, 2026 05:36 PM

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज AIIMS ट्रॉमा सेंटर में सत्य निकेतन में गिरी इमारत की घटना के पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात करने के लिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंची। इस पीड़ित परिजन रेखा गुप्ता को देखकर भावुक हो गए। इस दौरान उन्होंने पीड़ित...
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज AIIMS ट्रॉमा सेंटर में सत्य निकेतन में गिरी इमारत की घटना के पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात करने के लिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंची। इस पीड़ित परिजन रेखा गुप्ता को देखकर भावुक हो गए। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिजनों को गले लगाया उन्हें सांत्वना दी। सीएम ने बताया मैंने घायल बच्चों से मुलाकात की है। एक मजदूर यहां भर्ती है, जो अभी ठीक है। 2 बच्चे बिल्कुल ठीक हैं और एक बच्चा ICU में है। मैंने परिजनों से भी मुलाकात की है। सारी स्थिति को देखते हुए हमने अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि बच्चों का इलाज पूरी तरीके से अच्छे से हो और सरकार इसमें उनकी पूरी मदद करेगी, हर तरह की सहायता करेगी। हम आर्थिक मदद भी करेंगे। उन्होंने मृतक के परिजनों को 5- 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद का ऐलान भी किया है।
आप को बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास सत्य निकेतन स्थित पीजी इमारत के बेसमेंट में पानी के रिसाव (सीपेज) की पुरानी समस्या थी। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को इस इमारत के गिरने से सात लोगों के मौत हो गई थी। इस इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट व्यवस्था के रूप में किया जा रहा था।
पुलिस अब उस ठेकेदार की तलाश कर रही है जो बेसमेंट में रिसाव की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम करा रहा था। सूत्रों ने बताया कि पुलिस उन परिस्थितियों की जांच कर रही है जिनमें यह काम कराया जा रहा था, और क्या इसके कारण कोई ढांचागत बदलाव हुआ जिससे भवन ढह गया। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने भी दक्षिण जोन में कार्रवाई तेज कर दी है। सात सितंबर के आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चला है कि भवन विभाग ने वार्ड 160 में मैदानगढ़ी, सैदुलाजाब और नेब सराय सहित अन्य क्षेत्रों की पांच आवासीय संपत्तियों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किए हैं, जबकि सैदुलाजाब में एक अन्य आवासीय संपत्ति को जर्जर होने की वजह से गिराने की कार्रवाई की गई है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि सत्य निकेतन में दशकों पुरानी यह इमारत लगभग 55 वर्ग मीटर में फैली हुई थी और इसमें एक बेसमेंट तथा भूतल और चार ऊपरी मंजिलें थीं। बताया जाता है कि प्रत्येक मंजिल पर दो कमरे थे और हर कमरे में दो बिस्तर थे। इस संरचना में खंभे और बीम नहीं थे। यह इमारत रविवार को दोपहर करीब 1:30 बजे मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई। मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई।
पुलिस ने इमारत ढहने के सिलसिले में इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेवा से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार कर लिया है। शुरू में हरिराम को संपत्ति का मालिक माना जा रहा था, लेकिन पुलिस ने कहा कि दस्तावेजों से पता चला है कि इमारत की मालकिन उर्मिला हैं, जबकि हरिराम और महेश कथित तौर पर पीजी का प्रबंधन संभालते थे। इमारत ढहने की घटना के बाद नगर निकाय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, जिसके तहत एमसीडी के दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों - अधीक्षण अभियंता रणबीर सिंह, अधिशासी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार को निलंबित कर दिया गया।
एमसीडी ने पूरी दिल्ली में इमारतों, विशेष रूप से ऊंचाई और मंजिल सीमाओं का उल्लंघन करने वाली संरचनाओं के निरीक्षण का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अधिकारियों को शहर में सभी पांच मंजिला ढांचों को सील करने का निर्देश दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उच्च स्तरीय एमसीडी जांच के आदेश देते हुए कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उच्च न्यायालय ने इस घटना को "अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधु ने पीजी हब में निरीक्षण के निर्देश दिए और अधिकारियों से इमारतों के लिए सुरक्षा मानदंडों को सख्ती से लागू करने को कहा है।