Edited By Mahima,Updated: 10 Dec, 2024 11:03 AM

कपड़ा और परिधान उद्योग में प्रस्तावित जी.एस.टी. दरों की बढ़ोतरी का विरोध हो रहा है। 1,500 रुपए से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर जी.एस.टी. दर बढ़ाकर 18% और 10,000 से अधिक कीमत वाले परिधानों पर 28% करने का प्रस्ताव है। क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने...
नेशनल डेस्क: कपड़ा और परिधान उद्योग से जुड़े कारोबारी जी.एस.टी. दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। मंत्री समूह 1,500 रुपए से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर जी.एस.टी. दर 12% से बढ़ाकर 18% और 10,000 रुपए से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर इसे 28% तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में कपड़ों पर जी.एस.टी. दो स्लैब में 5% और 12% हैं।
सी.एम.ए.आई. का विरोध
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी.एम.ए.आई.) के प्रमुख राहुल मेहता ने इस प्रस्तावित बढ़ोतरी का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई दरें खासकर हाथ से बुने हुए कपड़ों के निर्माताओं और बुनकरों पर नकारात्मक प्रभाव डालेंगी। उनका कहना है कि 1,500 रुपए से अधिक कीमत वाले कपड़े जैसे ऊनी स्वेटर, जो उत्तर भारत में एक जरूरी वस्तु है, उनके लिए यह वृद्धि अत्यधिक होगी। इस पर जी.एस.टी. की दर 18% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो उद्योग के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।
शादी के कपड़ों पर भी असर
मेहता ने उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के कपड़ों की कीमत हमेशा 10,000 रुपए से अधिक होती है और अगर इन पर जी.एस.टी. बढ़ाया जाता है, तो पूरा शादी का परिधान कारोबार असंगठित क्षेत्र में चला जाएगा या खत्म हो सकता है। यह बढ़ोतरी उद्योग के छोटे कारोबारी और बुनकरों के लिए खासतौर से चुनौतीपूर्ण होगी।
कपड़ा उद्योग में दरों की विसंगति
भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सी.आई.टी.आई.) और दक्षिणी भारत मिल्स एसोसिएशन (एस.आई.एम.ए.) ने इस मामले में जी.एस.टी. के उल्टे शुल्क ढांचे को लेकर आपत्ति जताई है। एम.एम.एफ. (मानव निर्मित फाइबर) फाइबर पर 18%, यार्न पर 12%, और फैब्रिक पर 5% जी.एस.टी. लगता है, जबकि तैयार कपड़ों पर 5% से 12% तक दरें हैं। एस.आई.एम.ए. के अध्यक्ष एस.के. सुंदररमन ने इसे विसंगति करार दिया और सरकार से इसे सुधारने की मांग की है।
जी.एस.टी. परिषद की स्थिति
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सी.बी.आई.सी.) ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि जी.एस.टी. दरों में बदलाव पर मंत्रियों के समूह (जी.ओ.एम.) की सिफारिशें अभी अंतिम रूप से तय नहीं की गई हैं। मीडिया में जो खबरें चल रही हैं, वह समय से पहले की हैं और सिर्फ अटकलबाजी हैं। जी.एस.टी. परिषद की बैठक 21 दिसंबर को जैसलमेर में होगी, जिसमें सिफारिशों पर अंतिम विचार किया जाएगा।