PoK में पाक सरकार के खिलाफ बगावत: पुलिस हिंसा में 46 प्रदर्शनकारियों की मौत व 1000 गिरफ्तार, श्रीनगर से लंदन तक गूंजा विरोध (Video)

Edited By Updated: 13 Jun, 2026 08:23 PM

protests intensify in pakistan occupied kashmir 46 killed over 1000 arrested

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आरक्षित विधानसभा सीटों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तान सरकार के बीच टकराव के बीच कई लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों की खबरें हैं। इस मुद्दे को लेकर भारत...

Peshawar: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आरक्षित विधानसभा सीटों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े जनआंदोलन में बदल चुका है। पिछले चार दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 46 प्रदर्शनकारियों की मौत और 1,000 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी के दावे सामने आए हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। क्षेत्र में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि सामान्य जनजीवन लगभग ठप पड़ गया है। दवाओं और आवश्यक खाद्य सामग्री की कमी की खबरें मिल रही हैं, जबकि मुजफ्फराबाद और मीरपुर समेत कई प्रमुख शहरों में बाजार, स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद पड़े हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके चलते PoK का बड़ा हिस्सा बाहरी दुनिया से लगभग कट गया है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

12 आरक्षित सीटों पर विवाद 
वर्तमान आंदोलन की जड़ PoK विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। स्थानीय संगठनों का एक वर्ग लंबे समय से इस व्यवस्था का विरोध करता रहा है। उनका तर्क है कि इन सीटों के कारण स्थानीय आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ता है।  तनाव उस समय और बढ़ गया जब 7 जून को PoK सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।  अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह संवैधानिक व्यवस्था है और इसे न्यायिक हस्तक्षेप के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता। इस निर्णय के बाद Jammu and Kashmir Joint Awami Action Committee ने अपने आंदोलन को और तेज कर दिया और आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।

 

क्या है JAAC?
जेएएसी (जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी) का गठन वर्ष 2023 में प्रॉपर्टी टैक्स के विरोध के दौरान हुआ था। इसके अध्यक्ष Shaukat Nawaz Mir हैं। संगठन समय-समय पर महंगाई, करों और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने जून 2026 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया और इसके कुछ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। आंदोलन से जुड़े नेताओं पर देशद्रोह सहित कई मामलों में मुकदमे दर्ज किए जाने की खबरें हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

 

विदेशों तक पहुंची विरोध की गूंज
PoK की स्थिति को लेकर ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका में रहने वाले प्रवासी समुदायों के बीच भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। लंदन और न्यूयॉर्क में आयोजित प्रदर्शनों में लोगों ने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और गिरफ्तारियों पर चिंता व्यक्त की है।


श्रीनगर में भी दिखा विरोध
PoK में चल रहे घटनाक्रम के विरोध में श्रीनगर में भी प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए और PoK में कथित दमन को लेकर चिंता जताई। मानवाधिकार कार्यकर्ता Javed Beg ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। फारूक अब्दुल्ला ने ने भी हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को मामले की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने पर विचार करना चाहिए।


चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक संकट
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब जुलाई में PoK विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ता जनाक्रोश चुनावी माहौल और क्षेत्र की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। PoK की राजनीति में Pakistan Tehreek-e-Insaf, Pakistan Muslim League (N) और Pakistan Peoples Party प्रमुख दल माने जाते हैं।

 

राशन और दवाओं का संकट गहराया
लगातार बंद और इंटरनेट प्रतिबंधों के कारण लोगों के सामने दवाओं, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कमी की समस्या पैदा हो गई है। व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हैं और आम नागरिकों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। PoK में जारी यह आंदोलन अब केवल आरक्षित सीटों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक नीतियों और जनता की असंतुष्टि का बड़ा प्रतीक बनता जा रहा है।

  

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