छत्तीसगढ़ सरकार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू करेगी ‘हॉर्नबिल सफारी’, टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

Edited By Updated: 24 Jun, 2026 06:13 PM

the chhattisgarh government will launch a  hornbill safari  in the udanti sitana

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी बाघ संरक्षित क्षेत्र में 'हॉर्नबिल सफारी' शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी बाघ संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने...

नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी बाघ संरक्षित क्षेत्र में 'हॉर्नबिल सफारी' शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी बाघ संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर बाघ संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों-- ओढ़, अमलोर और आमामोरा में 'हॉर्नबिल सफारी' प्रारंभ करने का निर्णय लिया है जो दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार कार्य किए 
उन्होंने बताया कि 'हॉर्नबिल सफारी' से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है। अधिकारियों ने बताया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह सफलता 'शिकार रोधी अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण और रोपण तथा 'हॉर्नबिल रेस्टोरेंट' जैसी अभिनव पहल का परिणाम है, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

टूरिज्म के लिए जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि सफारी के संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने बताया कि पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को 'बर्ड वॉचिंग' तथा 'नेचर गाइड' का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार का अवसर मिलेगा तथा सामुदायिक आधारित 'इको-टूरिज्म' को बढ़ावा मिलेगा।

प्रकृति पर्यटन का केंद्र
उन्होंने बताया कि रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख 'बर्डिंग' और प्रकृति पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता देखा जा सकता है। 
 

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