Edited By Mansa Devi,Updated: 22 Mar, 2026 12:50 PM

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है और इसका सीधा प्रभाव लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है और इसका सीधा प्रभाव लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। गैस शिपमेंट में देरी और लोगों द्वारा ज्यादा बुकिंग करने की वजह से सिलेंडरों की मांग अचानक बढ़ गई है। इसी समस्या को कम करने के लिए गुरुग्राम में देश का पहला LPG ATM शुरू किया गया है।
गुरुग्राम में शुरू हुआ LPG ATM
हरियाणा के गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र के सेक्टर 33 स्थित सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली में यह खास मशीन लगाई गई है। इसे भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया है। इस मशीन की मदद से लोग सिर्फ 2 से 3 मिनट में गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। अब लोगों को गैस डिलीवरी के लिए इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहती है, जिससे उपभोक्ता किसी भी समय सिलेंडर ले सकते हैं। इस सिस्टम में न तो फोन कॉल करने की जरूरत है और न ही किसी बुकिंग स्लॉट या डिलीवरी टाइम का इंतजार करना पड़ता है। एक आसान डिजिटल प्रक्रिया के जरिए तुरंत सिलेंडर मिल जाता है।
कैसे काम करती है यह मशीन
इस मशीन का इस्तेमाल करना काफी आसान है। सबसे पहले यूजर को मशीन की स्क्रीन पर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है। इसके बाद मोबाइल पर आए OTP से पहचान सत्यापित की जाती है। फिर खाली सिलेंडर पर लगे QR कोड या बारकोड को स्कैन करना होता है, जिससे यह जांच हो सके कि सिलेंडर वैध है या नहीं। वेरिफिकेशन के बाद मशीन का एक स्लॉट खुलता है, जिसमें यूजर को अपना खाली सिलेंडर रखना होता है। मशीन अपने आप सिलेंडर की जांच करती है और उसे अंदर ले लेती है। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई गई कीमत का भुगतान UPI के माध्यम से करना होता है। पेमेंट पूरा होते ही मशीन के दूसरे हिस्से से भरा हुआ सील बंद सिलेंडर बाहर आ जाता है। पूरी प्रक्रिया में केवल 2 से 3 मिनट का समय लगता है।
क्या हैं इसकी खासियतें
इस मशीन में 10 किलो वाले कंपोजिट सिलेंडर मिलते हैं, जो पारंपरिक लोहे के सिलेंडरों की तुलना में हल्के होते हैं और इस्तेमाल में आसान होते हैं। एक बार में इस मशीन में करीब 10 सिलेंडर रखे जा सकते हैं। जैसे ही स्टॉक कम होकर दो सिलेंडर रह जाते हैं, मशीन अपने आप नजदीकी गैस एजेंसी को रिफिल के लिए सूचना भेज देती है।
कंपोजिट सिलेंडर कैसे लें
अगर कोई उपभोक्ता इस सुविधा का उपयोग करना चाहता है, तो उसे पहले अपने पारंपरिक 14.2 किलो वाले लोहे के सिलेंडर को कंपोजिट सिलेंडर में बदलना होगा। इसके लिए उपभोक्ता को अपने गैस एजेंसी पर जाकर जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। पुराने सिलेंडर की सिक्योरिटी राशि और नए सिलेंडर की कीमत के बीच का अंतर जमा करने के बाद नया कंपोजिट सिलेंडर मिल जाता है। कंपोजिट सिलेंडर की कीमत पारंपरिक सिलेंडर से थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन इसका हल्का वजन और आसान इस्तेमाल इसे सुविधाजनक बनाता है।