Edited By Anu Malhotra,Updated: 20 Mar, 2026 01:29 PM

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने रसोई गैस के वितरण को लेकर एक बेहद सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर दी है। प्रदेश में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए अब 'वन टाइम पासवर्ड' यानी OTP और डायरी एंट्री को अनिवार्य बना दिया...
नेशनल डेस्क: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने रसोई गैस के वितरण को लेकर एक बेहद सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर दी है। प्रदेश में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए अब 'वन टाइम पासवर्ड' यानी OTP और डायरी एंट्री को अनिवार्य बना दिया गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी डिलीवरी मैन बिना डिजिटल वेरिफिकेशन और मैन्युअल एंट्री के उपभोक्ता को सिलेंडर नहीं सौंप पाएगा।
इस नई रणनीति के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य गैस के 'डायवर्जन' को रोकना है, जहां घरेलू सिलेंडरों को अक्सर व्यावसायिक उपयोग के लिए अवैध रूप से बेच दिया जाता था। अब हर डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा, जिसे साझा करने के बाद ही सिलेंडर की सप्लाई पूरी मानी जाएगी। साथ ही, उपभोक्ता की गैस डायरी में रिकॉर्ड दर्ज करना भी अब अनिवार्य होगा ताकि भविष्य में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।
सप्लाई चेन को दुरुस्त रखने के लिए सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि राज्य में गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा और 3 से 4 दिनों के भीतर सिलेंडर घर पहुंच जाएगा। विशेष रूप से अस्पताल और स्कूलों जैसे आवश्यक संस्थानों के लिए निर्बाध आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए अब निरीक्षण के दौरान जियो-टैगिंग तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। फील्ड अधिकारियों को हर दिन कम से कम एक गैस एजेंसी का औचक निरीक्षण करना होगा और अपनी रिपोर्ट लोकेशन प्रूफ के साथ विभाग को भेजनी होगी। सरकार का सबसे ज्यादा ध्यान ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों पर है, जहां अक्सर सप्लाई के नाम पर हेराफेरी की खबरें आती थीं। जो एजेंसियां इन नियमों की अनदेखी करेंगी, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।