हाई कोर्ट पहुंचीं सोनम वांगचुक की पत्नी, बोलीं- इलाज के नाम पर पति को एम्स में कैद कर रही है दिल्ली पुलिस

Edited By Updated: 19 Jul, 2026 11:43 AM

wangchuk case now in high court wife knocks on court door

लद्दाख के प्रमुख शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर कानूनी लड़ाई अब देश की देश की राजधानी की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गई है। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने Delhi High Court का दरवाजा खटखटाते हुए इस मामले में...

Sonam Wangchuk Wife : लद्दाख के प्रमुख शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर कानूनी लड़ाई अब देश की देश की राजधानी की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गई है। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने Delhi High Court का दरवाजा खटखटाते हुए इस मामले में तुरंत सुनवाई की मांग की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के पुराने आदेशों का गलत फायदा उठाकर सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाया और उन्हें एक तरह से नजरबंद (Detained) कर दिया है। वहीं उन्होंने कहा कि इलाज के नाम पर उनके पति को दिल्ली पुलिस एम्स में कैद कर रही है। आंग्मो ने कहा कि उनका सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं रहा है और वह वांगचुक की तबीयत और बिगड़ने से पहले उन्हें वहां से निकालकर अपनी पसंद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना चाहती हैं।

आंग्मो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन का इलाज किस अस्पताल में कराया जाए, यह तय करने के लिए प्रशासन से संघर्ष करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल द्वारा जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में वांगचुक के पोटेशियम स्तर के वास्तविक आंकड़े को सुविधाजनक ढंग से छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा, बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अस्पताल उन्हें छुट्टी देने या हमारी पसंद के किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दे रहा है।

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गीतांजलि आंगमो द्वारा कोर्ट में दी गई अर्जी में दिल्ली पुलिस और अस्पताल प्रशासन के रवैये पर कई गंभीर कानूनी सवाल खड़े किए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक को एम्स (AIIMS) के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की देखरेख के नाम पर रखा गया है लेकिन असल में वहां उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। जिस मंजिल पर हम हैं वहां लगभग 30 पुलिसकर्मी तैनात हैं और पूरे अस्पताल में 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद हैं। हमारी आवाजाही पर कड़ी पाबंदी है। यह चिकित्सकीय देखभाल नहीं, बल्कि अवैध हिरासत है। उन्होंने कहा, इसलिए मैंने उच्च न्यायालय का रुख किया है और आज तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है ताकि सोनम की तबीयत और बिगड़ने से पहले उन्हें स्थानांतरित करने की अनुमति मिल सके।

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किसी भी परिवार को अपने प्रियजन का इलाज किस अस्पताल में कराया जाए, यह तय करने के लिए प्रशासन से संघर्ष करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। बता दें कि वांगचुक को शनिवार को उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं और इस विवाद से जुड़े छात्रों की कथित मौत के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। 

 

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