Edited By Radhika,Updated: 24 Feb, 2026 05:19 PM

"मम्मी, रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भर रहा हूँ, लैंडिंग के बाद बात करूँगा।" ये आखिरी शब्द थे युवा पायलट स्वराजदीप सिंह के, जो उन्होंने विमान उड़ाने से चंद मिनट पहले अपनी माँ से कहे थे। किसे पता था कि यह एक बेटे की अपनी माँ से आखिरी बातचीत होगी।
नेशनल डेस्क: "मम्मी, रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भर रहा हूँ, लैंडिंग के बाद बात करूँगा।" ये आखिरी शब्द थे युवा पायलट स्वराजदीप सिंह के, जो उन्होंने विमान उड़ाने से चंद मिनट पहले अपनी माँ से कहे थे। किसे पता था कि यह एक बेटे की अपनी माँ से आखिरी बातचीत होगी। कुछ घंटों बाद जब परिवार ने संपर्क करने की कोशिश की, तो फोन बंद मिला और टीवी स्क्रीन पर विमान क्रैश की खबरें तैरने लगीं। अनहोनी की आशंका के बीच अंततः कंपनी के एक 'ईमेल' ने परिवार की सारी उम्मीदों को राख में बदल दिया।
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उजड़ गया एक हँसता-खेलता आशियाना
स्वराजदीप की मौत की खबर ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अभी महज 20 महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी और घर में तीन महीने का छोटा बच्चा है। जिस पिता को अपने बेटे की कामयाबी पर गर्व था और जो माँ उसके लौटने की राह देख रही थी, आज उनके आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

मातम में डूबा मोहल्ला: नहीं जले घरों में चूल्हे
स्वराजदीप केवल एक कुशल पायलट ही नहीं, बल्कि अपने मोहल्ले के चहेते और संस्कारी युवक भी थे। स्थानीय निवासी अमरदीप सिंह और मुख्तियार सिंह ने दुख जताते हुए कहा कि स्वराजदीप जैसा होनहार बेटा खोना पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। हादसे की खबर मिलते ही पड़ोसियों के घरों में चूल्हे नहीं जले और हर कोई गमगीन परिवार को ढांढस बंधाने पहुँच रहा है।
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सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
इस दुखद हादसे ने DGCA और एविएशन कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है कि आखिर तकनीकी खामियों के चलते बार-बार विमान हादसे क्यों हो रहे हैं? लोगों ने सरकार से मांग की है कि विमानन सुरक्षा के कड़े मानक तय किए जाएं, हादसे की निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच हो। पुरानी या तकनीकी रूप से कमजोर विमानों का संचालन करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।