सरकार की नीयत जनता समझ चुकी, पेट्रोल-डीजल महंगाई पर पवन खेड़ा ने बीजेपी पर बोला हमला

Edited By Updated: 19 May, 2026 02:25 PM

the public has understood the government s intentions pawan khera attacked the

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इसे लेकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हमले पहले ही...

नेशनल डेस्क: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इसे लेकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हमले पहले ही कहा था  कि चुनाव नतीजे के बाद सरकार पेट्रोल, डीजल के दाम में वृद्धि  करेगी, लेकिन तब सरकार ने इसे लेकर कहा कि हमरी ऐसी कोई मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की जनता खुद ही देख रही है कि इनकी नीयत कैसी है। नेता ने कहा कि हर दिन 2 से 3 रुपया क्यों रेट बढ़ा रहे हैं एक ही दिन बढ़ा दीजिए जितना बढ़ाना है। 

एक सप्ताह में दूसरी बार बढ़े दाम 
उद्योग सूत्रों के अनुसार, ईंधन के दाम बढ़ने के बाद नयी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई जो पहले 97.77 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं डीजल की कीमत 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये हो गई। बीते शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार साल से अधिक समय में पहली बार तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। 

कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि
आप को बता दें कि अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद वैश्विक तेल की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि के बावजूद, खुदरा ईंधन की दरों को स्थिर रखा गया था। सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं को बढ़ती वैश्विक ऊर्जा लागत से बचाने के लिए उठाया गया। 

ईंधन खुदरा विक्रेताओं को भारी नुकसान 
हालांकि विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार ने राजनीतिक मकसद से दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि कई महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हो रहे थे। बीते शुक्रवार को तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि चुनावों के बाद और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल सहित पांच में से तीन राज्यों में जीत हासिल करने के बाद हुई। कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद ईंधन खुदरा विक्रेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा था कि 15 मई को हुई बढ़ोतरी से नुकसान में लगभग एक चौथाई की कमी आई है।

तेल कंपनियां प्रति दिन 750 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं 
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अब भी प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। विभिन्न राज्यों में मूल्य वर्धित कर (वैट) में अंतर के कारण ईंधन की कीमतें अलग-अलग हैं। इस वृद्धि के बाद मुंबई में पेट्रोल की कीमत 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94.08 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 109.70 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 96.07 रुपये प्रति लीटर है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 104.49 रुपये और डीजल की कीमत 96.11 रुपये हो गई है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि की तुलना में बढ़ाया गया मूल्य कम है। इसके बाद भी खुदरा ईंधन विक्रेताओं को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान
क्रिसिल के अनुसार, तेल कंपनियों को 15 मई को मूल्य वृद्धि के बाद पेट्रोल पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान है। ये दोनों मूल्य वृद्धि मार्च में घोषित उत्पाद शुल्क कटौती के साथ ही सरकार के ईंधन की खपत को कम करने और देश के तेल आयात बिल को नियंत्रित करने के उपायों के साथ हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है और लगातार तीसरे वर्ष चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा है। कुछ राज्य सरकारों ने पहले ही विभागों को यात्रा सीमित करने, आमने-सामने की बैठकों से बचने और कम कर्मचारियों के साथ कार्यालय चलाने के निर्देश दिए हैं। निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं ने पहले ही पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी थीं। 

देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी ने मार्च में पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की, जबकि शेल ने एक अप्रैल से पेट्रोल की कीमत में 7.41 रुपये और डीजल की कीमत में 25 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की। बेंगलुरु में शेल 119.85 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल 123.52 रुपये प्रति लीटर पर बेच रही है। खाना पकाने वाले घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी) की कीमत में मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई, लेकिन यह अभी भी वास्तविक लागत से काफी कम है।

 तेल कंपनियों को 14.2 किलोग्राम एलपीजी के एक सिलेंडर पर 674 रुपये का नुकसान हो रहा है। उद्योग सूत्रों के अनुसार ऐसा लगता है कि मूल्य वृद्धि सोच-विचार कर की जा रही है। यह वृद्धि एक तरफ तेल कंपनियों पर मुनाफे के दबाव को आंशिक रूप से कम करने के लिए पर्याप्त है, वहीं दूसरी तरफ इससे मुद्रास्फीति का कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा।

हालांकि, उनका कहना है कि इस वृद्धि का महंगाई पर कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा। विपक्षी दल कांग्रेस ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति को लेकर सरकार पर अपना हमला तेज कर दिया और कहा कि हालिया बढ़ोतरी उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले व्यापक मूल्य दबाव की सिर्फ शुरुआत है। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, '' अभी यह तो महज शुरुआत है, आगे और महंगाई बढ़ेगी...।'' पेट्रोल और डीजल के अलावा दिल्ली और मुंबई सहित कई शहरों में 15 मई को सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई थी। रविवार को सीएनजी की कीमत में फिर से एक रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई। 
 

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