प्रधानमंत्री मोदी का संसद की चर्चा में जवाब न देना 'लोकतंत्र की हत्या' : तिरुमावलवन

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 05:30 PM

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वीसीके संस्थापक और सांसद टी. तिरुमावलवन ने लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी के जवाब के बिना राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने को "लोकतंत्र की हत्या" और संसद के इतिहास में पहली घटना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने विपक्ष को चुप...

नेशनल डेस्क : वीसीके संस्थापक और सांसद टी. तिरुमावलवन ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जवाब के बिना राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने को "लोकतंत्र की हत्या" और भारतीय संसद के इतिहास में पहली घटना करार दिया।

चेन्नई हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में तिरुमावलवन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जानबूझकर विपक्ष को चुप कराने और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मुद्दों पर जवाबदेही से बचने के लिए हंगामा खड़ा किया। लोकसभा में जारी गतिरोध के कारण बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री मोदी के जवाब के बिना मंजूरी दे दी गई। राज्यसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों की तीखी आलोचना की।

विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) प्रमुख ने कहा, ''भारतीय संसद के इतिहास में यह पहली बार है कि प्रधानमंत्री के जवाब दिए बिना धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। सत्तारुढ़ दल ने ऐसा माहौल बनाया जहां विपक्ष और विपक्ष के नेता को बोलने का मौका नहीं दिया गया और केवल अपने सदस्यों के समर्थन से प्रस्ताव पारित करवाया।'' तिरुमावलवन ने दावा किया कि सरकार ने प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बाचतीत से संबंधित सवालों से बचने के लिए इन हथकंडों का सहारा लिया। उन्होंने कहा, "सत्तारुढ़ दल ने विपक्ष को इसलिए रोका क्योंकि उन्हें ट्रंप-प्रधानमंत्री बातचीत और कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठने का डर था। प्रधानमंत्री का सदन (लोकसभा) को संबोधित न करना हमारे लोकतंत्र पर एक बड़ा धब्बा है, जिसके लिए उन्हें जिम्मेदारी लेनी होगी।"

संसद में हाल में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान पर तीखा हमला करते हुए, दलित नेता ने भाजपा पर "तमिल विरोधी" भावना रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''भाषण की आड़ में मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह कहकर अपनी हीन भावना का प्रदर्शन किया कि तमिल एक ऐसी भाषा है जिसका इस्तेमाल भीख मांगने के लिए भी नहीं किया जा सकता। यही भाजपा की असली सोच है। वे मूल रूप से तमिल भाषा, तमिलनाडु और यहां के लोगों के खिलाफ हैं। इससे अधिक किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।'' 

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