इंदौर: तीन बार कांग्रेस के विधायक रहे अश्विनी जोशी का 66 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

Edited By Updated: 08 May, 2026 02:12 PM

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मध्य प्रदेश की राजनीति और इंदौर के कद्दावर कांग्रेस नेता अश्विनी जोशी का शुक्रवार सुबह हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। वह 66 वर्ष के थे। जोशी इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 से तीन बार विधायक रहे थे और मालवा क्षेत्र में कांग्रेस के सबसे...

नेशनल डेस्क: मध्य प्रदेश की राजनीति और इंदौर के कद्दावर कांग्रेस नेता अश्विनी जोशी का शुक्रवार सुबह हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। वह 66 वर्ष के थे। जोशी इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 से तीन बार विधायक रहे थे और मालवा क्षेत्र में कांग्रेस के सबसे पहचान वाले चेहरों में से एक थे पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, अश्विनी जोशी पिछले कुछ समय से सांस लेने में तकलीफ और पैरों की बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार सुबह करीब 8:00 बजे उनके निवास पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्हें तुरंत शेलबी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दिग्विजय सिंह के थे करीबी

अश्विनी जोशी अपने स्पष्टभाषी अंदाज और कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ाव के लिए जाने जाते थे। उन्होंने उस दौर में इंदौर के शहरी इलाकों में कांग्रेस संगठन को मजबूती दी, जब वहां भाजपा का दबदबा था। वह दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री महेश जोशी के भतीजे थे। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की थी। जोशी को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता था।

विवादों से नाता 

अश्विनी जोशी का राजनीतिक करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। उन पर 2006 में पूर्व कांग्रेस पार्षद मुन्ना अंसारी की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा था। हालांकि, 18 साल लंबे चले ट्रायल के बाद, 2024 में कोर्ट ने उन्हें साक्ष्यों के अभाव में इस मामले से बाइज्जत बरी कर दिया था।

इन नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीति जगत में शोक की लहर दौड़ गई। जीतू पटवारी (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस) ने जोशी के निधन को "हृदयविदारक" बताया और कहा कि उनकी संगठनात्मक क्षमता बेजोड़ थी। कमलनाथ (पूर्व मुख्यमंत्री) ने कहा कि इंदौर और राज्य के सार्वजनिक जीवन में जोशी का स्थान हमेशा विशेष रहेगा।  भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और इंदौर के विधायकों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए एक "मजबूत प्रतिद्वंद्वी" के रूप में याद किया, जिन्होंने राजनीति को कभी व्यक्तिगत संबंधों पर हावी नहीं होने दिया।

 

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