Edited By Anu Malhotra,Updated: 17 Jun, 2026 09:52 AM

Tinnu Yadav-Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद में अब एक नया नाम सामने आया है राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव। आधिकारिक दस्तावेजों में राम शंकर यादव के नाम से दर्ज टिन्नू यादव को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र...
Tinnu Yadav-Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद में अब एक नया नाम सामने आया है राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव। आधिकारिक दस्तावेजों में राम शंकर यादव के नाम से दर्ज टिन्नू यादव को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी माना जाता है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि मंदिर में आने वाले भारी-भरकम चढ़ावे और प्रबंधन को नियंत्रित करने वाली कोर टीम में टिन्नू का अच्छा-खासा प्रभाव है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) ने टिन्नू यादव समेत 6 सेवादारों को नोटिस भेजकर लंबी पूछताछ की है।
अयोध्या की गलियों में टेंपो चलाने से करोडड़ों संपत्ति तक!
टिन्नू यादव की अर्श से फर्श तक की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। अयोध्या के स्वर्गद्वार इलाके का रहने वाला टिन्नू एक बेहद साधारण परिवार से आता है। उसके पिता तुलसीराम यादव नया घाट पर चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे।
1994-95 के दौरान टिन्नू अयोध्या की सड़कों पर ऑटो और टेंपो चलाकर अपना गुजारा करता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के तत्कालीन मंत्री महेश नारायण से हुई। महेश नारायण ने टिन्नू की वफादारी को देखते हुए उसे अपना निजी ड्राइवर रख लिया। ड्राइवर बनने के बाद टिन्नू का कारसेवकपुरम में लगातार आना-जाना शुरू हुआ, जिससे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के बड़े पदाधिकारियों से उसकी जान-पहचान बढ़ती गई।
कैसे जीता चंपत राय का भरोसा?
साल 1991 में जब चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया, तब संगठन में उनका कद लगातार बढ़ रहा था। इसी दौरान 1998 में टिन्नू की मुलाकात सीधे चंपत राय से हुई। मई 2022 में महेश नारायण के निधन के बाद चंपत राय ने टिन्नू को पूरी तरह संरक्षण दे दिया। उसे कारसेवकपुरम में गाड़ियों और रसद प्रबंधन का जिम्मा सौंपा गया। अपनी कार्यकुशलता और भरोसे के दम पर टिन्नू ने चंपत राय का दिल जीत लिया। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने और राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद टिन्नू को ट्रस्ट के भीतर एक आधिकारिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कर लिया गया।
संपत्ति में तेजी से हुआ इजाफा
मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में महज कुछ हजार रुपये के मासिक वेतन पर काम करने वाले टिन्नू यादव की आर्थिक स्थिति पिछले 4-5 सालों में अचानक बेहद मजबूत हो गई। आरोपों के मुताबिक उसकी बेनामी संपत्तियों में काफी इजापा हुआ।
-अयोध्या के नाका और एयरपोर्ट रोड पर एक 24 कमरों का आलीशान दो मंजिला मकान है, जिसे छात्रों के लिए हॉस्टल के रूप में चलाया जा रहा है। इसके अलावा निषाद राज चौराहे के पास भी एक बड़ा हॉस्टल संचालित है। अयोध्या शहर के करीब 6 बड़े और नामी रेस्टोरेंट्स में टिन्नू की व्यावसायिक पार्टनरशिप होने की बात सामने आ रही है।
- इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विक्रमजोत क्षेत्र में लगभग 20 से 22 बीघा कृषि भूमि और लखनऊ में एक निजी आवास है। उसके पास स्कोडा और स्कॉर्पियो जैसी महंगी गाड़ियां भी हैं।
आरोपों पर परिवार की सफाई
इस पूरे विवाद और कथित 'चंदा घोटाले' पर टिन्नू यादव की पत्नी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने विपक्षी दलों और सोशल मीडिया के दावों को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि कोई उनकी 50 करोड़ रुपये की संपत्ति साबित कर दे, तो वह उसमें से 45 करोड़ रुपये तुरंत दान करने को तैयार हैं। फिलहाल, SIT की जांच जारी है और सच सामने आना बाकी है।