Edited By Mehak,Updated: 20 Mar, 2026 03:13 PM

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे तेल संकट की आशंका बढ़ गई है। Global Firepower की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा तेल उत्पादन अमेरिका करता है, उसके बाद सऊदी अरब और रूस का स्थान है। भारत इस सूची में...
नेशनल डेस्क : आज के समय में कच्चा तेल (Crude Oil) किसी भी देश की आर्थिक और सैन्य ताकत का अहम आधार माना जाता है। मौजूदा समय में मध्य पूर्व में जारी तनाव इसका ताजा उदाहरण है, जहां संघर्ष के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाला लगभग 20% तेल परिवहन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे कई तेल टैंकर फंसे हुए हैं।
तेल संकट और मिडिल ईस्ट का तनाव
मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और टकराव ने दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर धकेल दिया है। इस क्षेत्र से वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आता है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है।
दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देश
Global Firepower की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों की सूची जारी की गई है। इस सूची में अलग-अलग देशों को उनके दैनिक उत्पादन के आधार पर रैंक किया गया है।
- पहले स्थान पर संयुक्त राज्य अमेरिका है, जहां प्रतिदिन लगभग 20,953,000 बैरल तेल का उत्पादन होता है।
- दूसरे स्थान पर सऊदी अरब है, जो 11,174,000 बैरल प्रतिदिन उत्पादन करता है।
- तीसरे स्थान पर रूस है, जहां 10,879,000 बैरल प्रतिदिन तेल निकाला जाता है।
इसके बाद कनाडा और चीन क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। वहीं इराक छठे स्थान पर है।
7वें से 10वें स्थान तक के देश
रैंकिंग में आगे ब्राजील सातवें स्थान पर है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आठवें स्थान पर है।
नौवें स्थान पर ईरान और दसवें स्थान पर कुवैत है। ये देश वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अहम भूमिका निभाते हैं।
भारत की स्थिति
इस सूची में भारत 21वें स्थान पर है, जहां प्रतिदिन लगभग 82,200 बैरल तेल का उत्पादन होता है। हालांकि भारत खुद तेल का बड़ा उत्पादक नहीं है, लेकिन उसकी खपत बहुत अधिक है, जिससे वह आयात पर निर्भर रहता है।
तेल का वैश्विक महत्व
रिपोर्ट यह दर्शाती है कि तेल केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि यह किसी देश की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत को भी प्रभावित करता है। उद्योग, परिवहन और रक्षा जैसे क्षेत्र सीधे तौर पर तेल पर निर्भर हैं। इसलिए तेल उत्पादक देशों का वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी बड़ा प्रभाव होता है।