Alert: अगले कुछ महीने भारत के लिए भारी, खाना-पीना और तेल सब हो सकता है महंगा; जानिए वजह

Edited By Updated: 30 Apr, 2026 11:26 AM

inflation may rise in india amid war and weather

Middle East में चल रहे तनाव का असर ग्लोबल लेवल पर पड़ा है। इस तनाव का असर भारत में भी दिख रहा है। वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक आर्थिक समीक्षा (MER) में यह स्वीकार किया गया है कि ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण देश की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे आने...

War Risk: Middle East में चल रहे तनाव का असर ग्लोबल लेवल पर पड़ा है। इस तनाव का असर भारत में भी दिख रहा है। वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक आर्थिक समीक्षा (MER) में यह स्वीकार किया गया है कि ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण देश की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे आने वाले समय में महंगाई बढ़ने का खतरा है।

सप्लाई चेन पर 'युद्ध' का साया

रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों में जारी अस्थिरता ने भारत के व्यापारिक और वित्तीय प्रवाह को जोखिम में डाल दिया है। ऐसी संभावना है कि इससे गैस की सप्लाई बाधित हो सकती है। इसके सामान्य होने में अभी कई महीनों का समय लग सकता है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर उद्योगों (जैसे मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स) की लागत बढ़ सकती है। इसका बोझ आम जनता पर पड़ सकता है,इससे महंगाई बढ़ सकती है। 

अल नीनो: खेती और मानसून पर संकट

युद्ध के अलावा, अल नीनो का प्रभाव भी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार मानसून सामान्य से भी कम रह सकता है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर पैदावार पर बुरा असर होगा, जिससे खाने वाली चीज़ों के दाम बढ़ सकते हैं।

आर्थिक विकास दर और घाटे का अनुमान

इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

विवरण

अनुमान / प्रभाव

विकास दर (FY25)

7.6% रहने का अनुमान है।

विकास दर (FY27)

7% से 7.4% के बीच रहने की संभावना।

प्रमुख जोखिम

राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने की आशंका।

 सुरक्षा कवच: भारत की मजबूती के आधार

वित्त मंत्रालय द्वारा ऐसे कारकों के बारे में बताया गया है, जिससे भारत को स्थिरता मिलती है, जो इस प्रकार है-

  • मजबूत बैंकिंग सेक्टर: बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी मौजूद है, जिससे वित्तीय प्रणाली सुरक्षित है।

  • घरेलू मांग: भारत की आंतरिक मांग और सार्वजनिक निवेश अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में मदद कर रहे हैं।

  • व्यापारिक समझौते (FTA): नए मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय निर्यात को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

 

 

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