Edited By Tanuja,Updated: 13 Jun, 2026 12:56 PM

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi के सकारात्मक बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रीपोस्ट किया है। हालांकि समझौते की शर्तों और इसके अंतिम रूप को लेकर अभी भी कई सवाल...
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। दोनों देशों के बीच महीनों से जारी तनाव और हालिया सैन्य टकराव के बाद अब समझौते की उम्मीदें बढ़ी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) का वह संदेश है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने सोशल मीडिया मंच पर रीपोस्ट किया जिसके बाद दुनिया की बांछें खिल गईं। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप द्वारा किसी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के संदेश को सार्वजनिक रूप से साझा करना बेहद असामान्य माना जाता है। इससे संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
अराघची बोले- समझौता करीब लेकिन...
अराघची ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि अमेरिका और ईरान समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि उन्होंने लोगों से अपील की कि जब तक समझौता अंतिम रूप नहीं ले लेता, तब तक उसकी शर्तों को लेकर अटकलें लगाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगा और समझौते का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद उसकी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां जनता के साथ साझा की जाएंगी।
जिनेवा में हो सकते हैं हस्ताक्षर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड के जिनेवा में एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष एक ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (एमओयू) के मसौदे पर सहमत हो चुके हैं और अब अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनने का दावा किया जा रहा है
समझौते की संभावित प्रमुख शर्तें
- सभी मोर्चों पर 60 दिनों का युद्धविराम लागू होगा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए पूरी तरह खोला जाएगा।
- ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी में ढील दी जाएगी।
- ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता जताएगा।
- क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए नई सुरक्षा व्यवस्थाओं पर काम होगा।
- युद्ध के कारण प्रभावित व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
- हालांकि इन शर्तों की अभी तक किसी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
उपराष्ट्रपति वेंस ने दी चेतावनी
जहां ट्रंप का रुख आशावादी दिखाई दे रहा है, वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने चेतावनी दी है कि समझौते को लेकर बड़ी मात्रा में गलत और भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। वेंस ने स्पष्ट किया कि ईरान को केवल बातचीत में शामिल होने या समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले कोई नकद भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करना है। उनके अनुसार यदि ईरान अपनी जिम्मेदारियों का पालन करता है, तो पूरे क्षेत्र को आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता का लाभ मिल सकता है।
पाकिस्तान भी लेने लगा मध्यस्थता का श्रेय
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने दावा किया है कि उनकी सरकार की मध्यस्थता कोशिशों ने बातचीत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शहबाज शरीफ ने कहा कि समझौते के अंतिम मसौदे की भाषा पर सहमति बन चुकी है और पाकिस्तान दोनों पक्षों के साथ मिलकर अगले चरण को अंतिम रूप देने में जुटा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ताकतें समझौते को विफल करने के लिए गलत सूचनाएं फैला रही हैं। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब समझौते के अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर होंगे। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराना अविश्वास, परमाणु कार्यक्रम का विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं और प्रतिबंधों का मुद्दा अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।