Edited By Tanuja,Updated: 05 Aug, 2026 03:01 PM

पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय चुनावों के बीच JAAC के विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसा बढ़ गई है। JAAC ने 30 से अधिक मौतों का दावा किया है, लेकिन संचार प्रतिबंधों के कारण स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल है। Amnesty ने इंटरनेट...
Islamabad: पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने के दावों, इंटरनेट प्रतिबंध और राजनीतिक आंदोलन पर कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थू-थू हो रही है। मानवाधिकार संगठनों से लेकर विदेशी सांसदों तक ने पारदर्शी जांच और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई है। प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने PoJK में क्षेत्रीय चुनावों के बीच रावलाकोट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में 30 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया है। हालांकि, संचार प्रतिबंधों के कारण इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल बनी हुई है।
PoJK में 45 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव तीन चरणों में हो रहे हैं। पहला चरण 27 जुलाई को हो चुका है, जबकि बाकी मतदान 2 और 10 अगस्त को होना है। JAAC ने चुनाव के बहिष्कार की अपील की है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सस्ती बिजली, आर्थिक राहत और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार शामिल हैं। पाकिस्तान प्रशासित क्षेत्र में 5 जून को JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया था। अधिकारियों ने इसके लिए क्षेत्र के एंटी-टेररिज्म कानून का इस्तेमाल किया। Amnesty International ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे नागरिक संगठन की स्वतंत्रता पर हमला बताया और सुरक्षा बलों द्वारा कथित घातक बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की।
Amnesty International और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जून में भी रावलाकोट और अन्य इलाकों में प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। Reuters ने जून में करीब दो सप्ताह की हिंसा में कम से कम 24 लोगों की मौत की रिपोर्ट दी थी। बाद में स्थानीय अनुमानों में यह संख्या करीब 30 तक पहुंचने की बात सामने आई। 29 जुलाई की Reuters रिपोर्ट के अनुसार, JAAC नेताओं ने रावलाकोट के आसपास 30 से अधिक मौतों का दावा किया। अधिकारियों ने सुरक्षा बलों के एक सदस्य की मौत और कुछ अन्य के घायल होने की जानकारी दी।
PoJK में 5 जून से मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध की वजह से घटनास्थल से स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल है। यही कारण है कि मृतकों और घायलों की वास्तविक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।PoJK में जारी संकट सिर्फ चुनावी विवाद तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से बिजली की कीमत, महंगाई, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय अधिकारों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। 2023 में उभरे JAAC आंदोलन में व्यापारी, वकील, परिवहन क्षेत्र और नागरिक समाज के कई समूह शामिल हुए।अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की जांच और पारदर्शिता की मांग के बीच PoJK की स्थिति अब पाकिस्तान के लिए एक गंभीर राजनीतिक और मानवाधिकार चुनौती बनती जा रही है।