Edited By Radhika,Updated: 22 May, 2026 10:58 AM
दहेज प्रताड़ना के कारण संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाली स्वर्गीय त्विषा शर्मा के परिवार ने शुक्रवार को मामले में एक नया और गंभीर मोड़ ला दिया है। परिवार ने इस मामले की मुख्य आरोपी और सेवानिवृत्त (retired) जज गिरिबाला सिंह द्वारा त्विषा की...
नेशनल डेस्क: दहेज प्रताड़ना के कारण संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाली स्वर्गीय त्विषा शर्मा के परिवार ने शुक्रवार को मामले में एक नया और गंभीर मोड़ ला दिया है। परिवार ने इस मामले की मुख्य आरोपी और सेवानिवृत्त (retired) जज गिरिबाला सिंह द्वारा ट्विशा की मौत के तुरंत बाद कई प्रभावशाली व्यक्तियों को किए गए कथित फोन कॉल्स पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच करने की मांग की है।
कोर्ट के दस्तावेजों से हुआ खुलासा
ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, परिवार को घटना के तुरंत बाद गिरिबाला सिंह द्वारा किए गए इन कॉल्स के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी। उन्हें इस बात का पता कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से चला। ट्विशा के वकील ने इस प्रेस नोट के साथ उन मोबाइल नंबरों और नामों की सूची भी जारी की है, जिनसे गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर संपर्क किया था। परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद कई आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) अधिकारियों, जजों, डॉक्टरों और वकीलों सहित कई रसूखदार लोगों से संपर्क साधा गया था।
प्रेस नोट के अनुसार इन प्रमुख नामों से कथित तौर पर जस्टिस मनोज कुमार (ADJ), जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह (लोकायुक्त), ए.के. मिश्रा (जिला न्यायाधीश), वकील वेनोश कार्लो, डॉ. राजबाला भदौरिया, सियाबाला बघेल, प्रमोद झारिया, डॉ. यशवीर, पंकज कुशवाहा, अजय सिंह, मनोज कुमार और अन्य से संपर्क किया गया । इसके अलावा CCTV मेंटेनेंस से जुड़े रोहित विश्वकर्मा और विनोद वाणी से भी संपर्क किया गया था।
सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका
प्रेस नोट में कहा गया है, "परिवार को इन बातचीत की सामग्री या उद्देश्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही वे इससे कोई निष्कर्ष निकाल रहे हैं। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए, इन कॉल्स के समय और उनकी frequency की SIT और सक्षम अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।" परिवार ने विशेष रूप से सीसीटीवी सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े लोगों के साथ किए गए संपर्क पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि किसी भी संदिग्ध मौत की जांच में सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण सबूत होते हैं, इसलिए इस पूरी संचार प्रक्रिया की फोरेंसिक जांच होनी चाहिए।
हमें समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई?
पीड़ित परिवार ने एक दर्दनाक पहलू यह भी उठाया कि जहां एक तरफ घटना के तुरंत बाद विभिन्न प्रभावशाली लोगों से धड़ाधड़ संपर्क किया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ त्विषा शर्मा के माता-पिता को उस समय कोई त्वरित सूचना, संवेदनशीलता या सहायता प्रदान नहीं की गई। परिवार ने केवल एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की अपील की है।
अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग
इससे पहले, गुरुवार को त्विषा शर्मा के वकील पीयूष कुमार तिवारी ने कोर्ट से मुख्य आरोपी और त्विषा की सास गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) रद्द करने की मांग की थी। वकील तिवारी ने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह को 15 मई को मिली अग्रिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है। वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जांच को भटकाने की कोशिश कर रही हैं। सबूतों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ का प्रयास किया जा रहा है। वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि सह-आरोपी समर्थ सिंह (त्विषा के पति) को जमानत मिलने की कोई संभावना नहीं है और वे कोर्ट से दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई करने और जल्द से जल्द दूसरा पोस्टमार्टम (Re-postmortem) कराने की तैयारी कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
नोएडा की रहने वाली त्विषा शर्मा का विवाह दिसंबर 2025 में भोपाल के समर्थ सिंह से हुआ था। विवाह के कुछ ही महीनों बाद, 12 मई 2026 को त्विषा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत के बाद उनके परिवार ने पति और ससुराल वालों पर मानसिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। पुलिस ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।