Edited By Tanuja,Updated: 08 Oct, 2026 11:40 AM

हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि उसके सैन्यकर्मी पहले से सऊदी अरब में तैनात हैं। आईएसपीआर प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना दशकों से वहां मौजूद है। हालांकि सैनिकों की संख्या और...
Riyadh: यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने बड़ा खुलासा किया है। पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग ISPR ने पुष्टि की है कि पाकिस्तानी सैन्यकर्मी पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं और वहां कई तरह की सैन्य क्षमताओं तथा क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ISPR के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में पहले से मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तैनाती नए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते से पहले की है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा संबंध कई दशकों पुराने हैं। पाकिस्तानी सैन्यकर्मी लंबे समय से सऊदी अरब में प्रशिक्षण, सलाह और अन्य सैन्य सहयोग से जुड़ी भूमिकाएं निभाते रहे हैं।
हालांकि, ISPR ने फिलहाल यह नहीं बताया कि सऊदी अरब में कितने पाकिस्तानी सैनिक मौजूद हैं और उनकी मौजूदा जिम्मेदारियां क्या हैं। अहमद शरीफ चौधरी ने केवल इतना कहा कि पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी कई क्षमताओं और क्षेत्रों में फैली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच मौजूदा रक्षा सहयोग अचानक शुरू नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य संबंध हैं। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने को तीनों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते को सामूहिक प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने और तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। पाकिस्तान ने इसे रक्षात्मक समझौता बताते हुए कहा है कि यह किसी विशेष देश के खिलाफ लक्षित नहीं है।
अगस्त में इस्तांबुल में हुई बैठक के दौरान तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों तथा सैन्य प्रमुखों ने रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने, रक्षा उद्योग में साझेदारी और संयुक्त तकनीकी विकास को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी। पाकिस्तान की यह पुष्टि ऐसे समय हुई है जब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच तनाव बढ़ रहा है। हूतियों ने सऊदी अरब को निशाना बनाकर हमले किए हैं, जबकि सऊदी समर्थित यमनी बलों ने रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूती ठिकानों के खिलाफ अभियान चलाया है। बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब पर अपनी वायु रक्षा और अन्य सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का दबाव बढ़ा है। मक्का समझौते को लागू करने की दिशा में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के सैन्य प्रमुखों ने रियाद में भी बातचीत की है। तीनों देश समझौते में किए गए वादों को अधिक प्रभावी सैन्य सहयोग में बदलने पर जोर दे रहे हैं।