केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने मिलन में वैश्विक नौसैनिक सहयोग को मजबूत करने का किया आह्वान

Edited By Updated: 20 Feb, 2026 12:25 PM

union minister rajnath singh calls for strengthening global naval cooperation

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वे समुद्री क्षेत्र में लगातार जटिल और परस्पर संबद्ध चुनौतियों का आपसी सम्मान और सहयोग की भावना से प्रेरित होकर समाधान करने के लिए सामूहिक रूप से काम करें।

नेशनल डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वे समुद्री क्षेत्र में लगातार जटिल और परस्पर संबद्ध चुनौतियों का आपसी सम्मान और सहयोग की भावना से प्रेरित होकर समाधान करने के लिए सामूहिक रूप से काम करें। बृहस्पतिवार को यहां 'अभ्यास मिलन' के उद्घाटन समारोह के दौरान 74 देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि जल दस्यु, समुद्री आतंकवाद, अवैध रूप से मछली पकड़ने, तस्करी जैसे पारंपरिक खतरे के साथ साथ अब साइबर खतरे और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान जैसी उभरती हुई चुनौतियों भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता बढ़ा रहा है जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान दिनों दिन अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो रहे हैं। कल रात जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में सिंह के हवाले से कहा गया है, ''अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना में नौसेनाओं की भूमिका समय के साथ बढ़ती ही गई है। पिछले कुछ दशकों में तीव्र आर्थिक विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय व्यापार और परिवहन में भारी वृद्धि हुई है। जलडमरूमध्य और जलमार्गों पर स्वामित्व के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, जिससे कभी-कभी संघर्ष की आशंका भी पैदा हो जाती है।''

उन्होंने कहा कि जलमग्न संसाधनों, विशेषकर दुर्लभ खनिजों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बढ़ने से तनाव में एक नया आयाम जुड़ रहा है। सिंह ने देशों और क्षेत्रों में फैल रही आतंकवादी गतिविधियों से जलक्षेत्रों की सुरक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी नौसेना चाहे कितनी भी सक्षम क्यों न हो, वह उभरती चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती। उन्होंने एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए नौसेनाओं के बीच बेहतर सहयोग के महत्व पर बल दिया।

केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से संबंधित मामलों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) द्वारा प्रदान किए गए मजबूत कानूनी ढांचे पर प्रकाश डाला जिसे एक व्यापक वैश्विक नौसेना संरचना के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है। सिंह के अनुसार, यूएनसीएलओएस राष्ट्रों के बीच विवादों के निवारण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और समय-परीक्षित तंत्र प्रदान करता है, और व्यापक वैश्विक नौसैनिक वास्तुकला सूचना साझाकरण को सुगम बनाएगी, संचार के लिंक की रक्षा करेगी और खुले समुद्र में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करने की अपनी सामान्य भूमिका भी निभाएगी।

उन्होंने कहा, ''जब हमारे जहाज एक साथ यात्रा करते हैं, जब हमारे नाविक एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं और जब हमारे कमांडर एक साथ विचार-विमर्श करते हैं, तो हम एक साझा समझ विकसित करते हैं जो भूगोल और राजनीति से परे होती है और सहयोग के इस विचार पर मंथन का एक उपयुक्त अवसर प्रदान करती है।'' उनके अनुसार, यूएनसीएलओएस राष्ट्रों के बीच विवादों के समाधान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला तंत्र प्रदान करता है।

यह व्यापक वैश्विक नौसैनिक संरचना सूचना साझाकरण को सुगम बनाएगी, संचार के माध्यमों की रक्षा करेगी और खुले समुद्र में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करने की अपनी सामान्य भूमिका भी निभाएगी। सिंह ने कहा कि स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है।

उन्होंने कहा कि मिलन जैसे मंच पेशेवर विशेषज्ञता को साथ लाते हैं, आपसी विश्वास का निर्माण करते हैं, अंतर-संचालनीयता को बढ़ाते हैं और सामान्य चुनौतियों के लिए समन्वित प्रतिक्रियाओं को सक्षम बनाते हैं। समुद्री सहयोग के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास योजना (सागर) की परिकल्पना से प्रेरित होकर देशों का दृष्टिकोण अब संपूर्ण क्षेत्र की समग्र सुरक्षा एवं विकास (महासागर) की परिकल्पना में बदल गया है।

उन्होंने कहा, ''सागर से महासागर की ओर यह बदलाव इस क्षेत्र और उससे परे के क्षेत्रों के साझेदारों के साथ जुड़ने की भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता दर्शाता है।'' राजनाथ सिंह ने कहा कि 'अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026' विश्व की नौसेनाओं के बीच सद्भावना, व्यावसायिकता और पारस्परिक सम्मान की स्पष्ट पुष्टि है। 

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