Edited By Tanuja,Updated: 23 Jun, 2026 01:42 PM

अमेरिका ने भारत को अपाचे हेलीकॉप्टर और M777A2 हॉवित्जर तोपों के लिए 482.2 मिलियन डॉलर (करीब ₹4,555 करोड़) की सैन्य सहायता और सपोर्ट सर्विसेज देने की मंजूरी दी है। इस सौदे से भारतीय सेना की परिचालन क्षमता और रखरखाव व्यवस्था मजबूत होगी तथा...
Washington: भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए अमेरिका ने भारतीय सेना के AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों और M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए 482.2 मिलियन डॉलर (लगभग ₹4,555 करोड़) के सपोर्ट पैकेज को मंजूरी दे दी है। इस पैकेज में रखरखाव, तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स और अन्य लॉजिस्टिक सेवाएं शामिल हैं। अमेरिका की Defense Security Cooperation Agency (DSCA) ने 17 जून को इस प्रस्तावित सौदे की आधिकारिक सूचना जारी की। यह एजेंसी अमेरिकी सरकार के फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) कार्यक्रम का संचालन करती है।
इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने भी अमेरिकी कांग्रेस को इस संभावित रक्षा सौदे के बारे में जानकारी दी थी। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा कि दोनों देश प्रतिदिन रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि M777A2 हॉवित्जर तोपों के लिए लगभग 230 मिलियन डॉलर का सपोर्ट पैकेज भी अंतिम चरण में है। राजदूत ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप है और साथ ही भारत की रक्षा क्षमताओं को बनाए रखने और मजबूत करने में मदद करेगा।
भारत ने M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों को अमेरिका से खरीदा था। इन हल्की लेकिन अत्यधिक प्रभावी तोपों को विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में तेजी से तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है। लद्दाख और उत्तरी सीमाओं पर इनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं, भारतीय वायुसेना और थलसेना के पास मौजूद AH-64E Apache हेलीकॉप्टर दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिने जाते हैं। ये सटीक हमले, टैंक रोधी अभियानों और युद्धक्षेत्र में सैनिकों को समर्थन देने में सक्षम हैं।
अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह पैकेज भारत को मौजूदा और भविष्य के सुरक्षा खतरों का सामना करने में मदद करेगा। इससे भारतीय सेना के महत्वपूर्ण हथियार प्लेटफॉर्म अधिक समय तक प्रभावी और संचालन योग्य बने रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा केवल उपकरणों के रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग और भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों की गहराई को भी दर्शाता है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत की सीमाओं पर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच यह सौदा भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करेगा। साथ ही यह दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का संकेत भी है।