US संसद में फिर गूंजा 1971 का काला सच: सीनेटर ने पाक सेना की खोली पोल, कहा- बंगाली हिंदुओं पर अत्याचार ‘नरसंहार घोषित करो’

Edited By Updated: 22 Mar, 2026 11:58 AM

us house introduces resolution for acknowledgment of 1971 bangladesh genocide

अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने 1971 में बंगाली हिंदुओं पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों को नरसंहार घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया। इसमें ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत हुई हत्याओं, बलात्कार और उत्पीड़न को युद्ध अपराध बताया गया है। प्रस्ताव अब अमेरिकी...

Washington: ग्रेग लैंड्समैन, जो अमेरिका के ओहायो से डेमोक्रेट सांसद हैं, ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। इसमें 1971 में बंगाली हिंदुओं के खिलाफ हुए अत्याचारों को “नरसंहार” और “युद्ध अपराध” घोषित करने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च 1971 को शेख मुजीबुर रहमान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू किया। इस अभियान के तहत पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में बड़े पैमाने पर हिंसा और दमन किया गया।

 

प्रस्ताव के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने जमात-ए-इस्लामी और अन्य उग्र संगठनों के साथ मिलकर आम नागरिकों, खासकर बंगाली हिंदुओं को निशाना बनाया। इसमें हजारों लोगों की हत्या, महिलाओं के साथ बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और विस्थापन जैसी घटनाएं शामिल थीं। इस प्रस्ताव में आर्चर ब्लड के ऐतिहासिक “ब्लड टेलीग्राम” का भी उल्लेख किया गया है। 28 मार्च 1971 को भेजे गए इस संदेश में उन्होंने इन घटनाओं को “चुनिंदा नरसंहार” बताया था और अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया था। बाद में 6 अप्रैल को भेजे गए एक और संदेश पर ढाका स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के 20 अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए थे।

 

प्रस्ताव में अमेरिकी संसद से अपील की गई है कि वह 1971 में हुए इन अत्याचारों की कड़ी निंदा करे और इन्हें मानवता के खिलाफ अपराध माने। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति से भी आग्रह किया गया है कि इन घटनाओं को आधिकारिक रूप से “नरसंहार” के रूप में मान्यता दी जाए। इसमें यह भी कहा गया है कि किसी भी समुदाय को उसके कुछ लोगों के अपराधों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए, लेकिन पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है।
 

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