Edited By Tanuja,Updated: 21 Mar, 2026 01:16 PM

अमेरिका और इजराइल ने हवाई हमलों के जरिए ईरान के रॉकेट और सैटेलाइट कार्यक्रम को बड़ा झटका दिया है। इन हमलों में सैन्य और अंतरिक्ष ढांचे को निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की मिसाइल और स्पेस क्षमताएं कमजोर होंगी।
International Desk: : अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के सैटेलाइट और रॉकेट प्रोग्राम को बड़ा झटका देने के लिए कई अहम ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, इन हमलों का मकसद उन तकनीकों को नष्ट करना है, जिनका इस्तेमाल भविष्य में हथियार कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है।रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों में ईरान के मुख्य सैटेलाइट डेवलपमेंट सेंटर, रक्षा मंत्रालय की सुविधाओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकाने को निशाना बनाया गया। ये संस्थाएं सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV) और बैलिस्टिक मिसाइल दोनों पर काम करती हैं।
खय्याम सैटेलाइट भी बना निशाना
इजराइल डिफेंस फोर्सेस ने 8 मार्च को दावा किया कि उसने ईरान के “खय्याम” सैटेलाइट के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया। यह सैटेलाइट रोसकॉसमॉस (रूस की स्पेस एजेंसी) द्वारा 2022 में लॉन्च किया गया था। 16 मार्च को इजराइल ने तेहरान में एक ऐसे परिसर को भी नष्ट करने का दावा किया, जहां एंटी-सैटेलाइट हथियारों और सैन्य स्पेस प्रोग्राम पर काम हो रहा था।
मिसाइल प्रोग्राम पर सीधा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट और मिसाइल टेक्नोलॉजी काफी हद तक समान होती है ऐसे में इन ठिकानों के नष्ट होने से ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता भी प्रभावित होगी।अमेरिकी रणनीतिक कमान के पूर्व प्रमुख एंथनी कॉटन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान का स्पेस प्रोग्राम ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) विकसित करने में मदद कर सकता है।
रूस और चीन पर बढ़ सकती निर्भरता
विश्लेषकों के अनुसार, इन हमलों के बाद ईरान की खुद की सैटेलाइट बनाने और लॉन्च करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। उसे रूस और चीन जैसे देशों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है। रूस पहले से ही ईरान को सैटेलाइट डेटा और सैन्य सहयोग दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल का लक्ष्य ईरान को अंतरिक्ष में सैन्य क्षमता हासिल करने से रोकना, उसकी मिसाइल ताकत को कमजोर करना वभविष्य में हमलों की क्षमता सीमित करना है।