धामी सरकार का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म! अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का किया गठन

Edited By Updated: 03 Feb, 2026 08:53 PM

uttarakhand madrasa board news

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जुलाई 2026 से उत्तराखंड में अलग से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व नहीं रहेगा।

नेशनल डेस्क: उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जुलाई 2026 से उत्तराखंड में अलग से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व नहीं रहेगा। इसकी जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है, जो राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की देखरेख करेगा।

नया प्राधिकरण मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदाय से जुड़े शिक्षण संस्थानों की मान्यता, निगरानी और पाठ्यक्रम निर्धारण की जिम्मेदारी संभालेगा।

मुख्यधारा शिक्षा से जुड़ेंगे अल्पसंख्यक संस्थान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले का उद्देश्य अल्पसंख्यक छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि सभी मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक संस्थान अब उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से संबद्ध होंगे।

इन संस्थानों में पढ़ाई नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) और नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार कराई जाएगी, ताकि बच्चों को आधुनिक और समान शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिल सके।

प्राधिकरण में कौन-कौन होंगे शामिल

अल्पसंख्यक मंत्रालय के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर ढाकाटे के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर नए प्राधिकरण में विभिन्न समुदायों के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

प्राधिकरण की संरचना इस प्रकार है:

  • अध्यक्ष: डॉ. सुरजीत सिंह गांधी
  • सदस्य:
  • प्रो. राकेश जैन
  • डॉ. सैय्यद अली हमीद
  • प्रो. पेमा तेनजिन
  • डॉ. एल्बा मेड्रिले
  • प्रो. रोबिना अमन
  • प्रो. गुरमीत सिंह
  • अन्य सदस्य: समाजसेवी राजेंद्र बिष्ट, सेवानिवृत्त अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट
  • पदेन सदस्य:
  • निदेशक, उच्च शिक्षा
  • निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण
  • निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण

सीएम धामी बोले – शिक्षा में पारदर्शिता और समानता का रास्ता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद अब नया प्राधिकरण अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा की दिशा और गुणवत्ता तय करेगा। सभी संस्थानों के लिए राज्य बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य होगा और सिलेबस को एक समान रूप से लागू किया जाएगा।

सीएम ने इसे शिक्षा सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता, गुणवत्ता और समान अवसर सुनिश्चित होंगे। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां मदरसा बोर्ड को समाप्त कर सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एक साझा व्यवस्था के तहत लाया जा रहा है।

कब से लागू होगा फैसला

यह बदलाव अक्टूबर 2025 में राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू हो रहा है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 के तहत जुलाई 2026 से मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2016 और उससे जुड़े नियम पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे।

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!