Jail में डेरा ब्यास मुखी की सिक्योरिटी से कॉम्प्रोमाइज, बाहर आते ही मजीठिया ने किया खुलासा

Edited By Updated: 03 Feb, 2026 03:39 PM

dera beas chief security compromised in jail

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया जेल से रिहा हो गए हैं।

पंजाब डेस्क : शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया जेल से रिहा हो गए हैं। नाभा की न्यू जेल से बाहर निकलते ही शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने "पंजाब केसरी" ग्रुप पर दर्ज किए गए कथित झूठे मामलों की कड़ी निंदा की और भावुक बयान देते हुए डेरा ब्यास के मुखी बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों जी और संत-महापुरुषों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद किया। मजीठिया ने कहा कि उनकी कोई हैसियत नहीं थी कि बाबा जी खुद उनसे मिलने जेल आएं, यह उनके लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद है।

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मजीठिया ने कहा, “मैं दिल की गहराइयों से सभी का धन्यवाद करता हूं। संत-महापुरुषों का धन्यवाद करता हूं। मेरी पत्नी से हमेशा कहा जाता था कि घबराना नहीं, वह मजबूत होकर जेल से बाहर निकलेगा।” उन्होंने बताया कि डेरा ब्यास के बाबा जी उनसे मिलने जेल आए, जो उनके लिए अविस्मरणीय पल था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “बाबा जी मुझसे मिलने आए, मेरी तो कोई औकात ही नहीं है। मैं बहुत बुरा इंसान हूं, लेकिन उन्होंने मुझ पर इतनी कृपा की, इतना प्यार दिया। बाबा जी जो जादू की झप्पी देकर गए, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”

हालांकि, मजीठिया ने इस दौरान जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बाबा जी की सुरक्षा के साथ समझौता किया गया। मजीठिया के अनुसार, पहले तो मिलने की परमिशन नहीं दी जा गई थी फिर बाबा जी की गाड़ी पीछे रोकी गई, उनकी सिक्योरिटी को जेल के अंदर तक आने नहीं दिया गया और सिक्योरिटी को बाहर ही रोक दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल प्रशासन ने चुनिंदा पत्रकारों को अंदर जाने की अनुमति दी जा रही थी। ऐसा करना बाबा जी की सुरक्षा में एक बड़ी चूक है। कोई शरारती तत्व मीडिया कर्मियों में शामिल होकर डेरा प्रमुख को किसी प्रकार का नुकसान भी पहुंचा सकता था। ऐसे में कौन जिम्मेदार होता।

मजीठिया ने कहा, “मुझे भी मूसेवाला की तरह मरवाया जा सकता था। ये तो चाहते थे कि मैं मरा हुआ बाहर आऊं, लेकिन देखों मैं जिंदा बाहर आ गया हूं। ये लोग जब पत्रकारों को नहीं बख्श रहे, तो मैं क्या हूं?” उनके इस बयान ने जेल सुरक्षा और वीआईपी मूवमेंट से जुड़े इंतजामों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मजीठिया की रिहाई के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया, वहीं उनके बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि उनके द्वारा उठाए गए सुरक्षा से जुड़े आरोपों पर प्रशासन और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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