SIR विवाद : जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का वीडियो वायरल, दिल्ली पुलिस ने बताई सच्चाई

Edited By Updated: 27 Sep, 2026 09:12 AM

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) अभियान को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो जिसमें जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन दिखाया गया है,...

नई दिल्ली : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) अभियान को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो जिसमें जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन दिखाया गया है, वह "पुराना" है और "किसी पुरानी घटना का आर्काइव्ड (पुराना) फुटेज" है। 

इस वायरल वीडियो को X (पहले ट्विटर) पर कई अकाउंट्स ने शेयर किया था, जिनमें शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत भी शामिल हैं। शनिवार को नई दिल्ली के DCP ने एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर लाइव और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का दावा 'गलत' है और जानबूझकर गुमराह करने वाली सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। 

पोस्ट में कहा गया, 'गलत जानकारी की चेतावनी: आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर लाइव, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का दावा गलत है। वीडियो पुराना है, शेयर किया जा रहा फुटेज किसी पुरानी घटना का आर्काइव्ड मटीरियल है। जानबूझकर गलत जानकारी या गुमराह करने वाली सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।'

राउत ने X पर वीडियो शेयर करते हुए दावा किया था, 'दिल्ली में 'ज्ञानेश कुमार हटाओ' के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, आज का जंतर-मंतर का दृश्य... आर-पार की लड़ाई!' यह स्पष्टीकरण ECI के कामकाज को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। यह विवाद 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं। 

विपक्षी दलों द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर आरोप लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के बाद EC को लेकर विवाद और बढ़ गया। इससे पहले शनिवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने लोगों से अपील की थी कि वे 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल हों और लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाएं। 

मुफ्ती ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, 'हर उस भारतीय से अपील है जो हमारे विविध देश को एक साथ रखने वाले लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को महत्व देता है। आइए हम सब मिलकर उस भारत के लिए आवाज़ उठाएं जिसमें हम विश्वास करते हैं। 29 सितंबर को दोपहर 2 से 5 बजे के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हमारे साथ जुड़ें।' उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों को तोड़ा जा रहा है और दावा किया कि वोटर लिस्ट से मुसलमानों के नाम हटाए जा रहे हैं। 

PDP प्रमुख ने कहा कि 'इंडियन मुस्लिम्स के लिए मॉनिटरिंग कमेटी' ने इन मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया है। शुक्रवार को इंडियन यूथ कांग्रेस ने भी रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक मार्च किया और चुनाव आयोग (EC) के खिलाफ कांग्रेस के देशव्यापी कार्यक्रम के तहत CEC के इस्तीफे की मांग की। इस बीच वामपंथी नेता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) CEC के खिलाफ एक संयुक्त विपक्षी मोर्चा बनाने पर जोर दे रहे हैं। 

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हुगली में एक रैली के दौरान ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपनी मांग दोहराई और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया। CPI(M) के महासचिव MA बेबी ने चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ व्यापक स्तर पर आवाज उठाने का आह्वान किया और कहा कि पार्टी ने 'INDIA' ब्लॉक से बाहर की पार्टियों से भी संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि CPI(M) ने एक व्यापक आंदोलन खड़ा करने के लिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को भी पत्र लिखा है।

CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए 30 सितंबर को 'INDIA' ब्लॉक की बैठक होने की उम्मीद है, साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि चर्चा केवल ब्लॉक के सहयोगियों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस बीच ECI ने आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि SIR शेड्यूल से संबंधित निर्णय "आयोग की सर्वसम्मत मंज़ूरी" से लिए गए थे। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र डेप्युटेशन पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था, न कि आयोग के किसी नीतिगत मामले से।

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