बेटियों को पढ़ाया-लिखाया, काबिल बनाया; पर आखिरी वक्त में कोई पास न आया, वृद्धाश्रम वालों ने बताई पूरी कहानी

Edited By Updated: 07 Aug, 2026 02:36 PM

74 year old shivcharan kept waiting for his loved ones until his last breath

हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे 74 वर्षीय शिवचरण रामरतन गुप्ता के निधन के बाद एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। इसके अनुसार इसे लेकर बेटियां अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई। इसे लेकर अब आश्रम चालक ने पूरी...

सोनीपत: हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे 74 वर्षीय शिवचरण रामरतन गुप्ता के निधन के बाद एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। इसके अनुसार इसे लेकर बेटियां अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई। इसे लेकर अब आश्रम चालक ने पूरी स्थिति साफ की है। वृद्धाश्रम के संचालक आनंद के अनुसार, मृतक शिवचरण गुप्ता लंबे समय से बीमार चल रहे थे। तकरीबन 20 दिन पहले उनकी बेटियों को उनके बीमार होने की खबर दी गई है। इसके बाद मैनेजमेंट को ऐसी उम्मीद थी कि अपने बीमार पिता से मिलने बेटियां जरुर आएंगी। लेकिन सभी ने अपनी पर्सनल व्यस्तताओं और मजबूरियों का हवाला देकर आने पाने का कारण दिया।

 

पत्नी का पहले ही हो चुका निधन
सामने आई जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के रहने वाले कपड़ा व्यापारी तकरीबन डेढ़ साल पहले अपनी पत्नी के साछ सोनीपत वृद्ध आश्रम आ गए। दंपति का कोई बेटा नहीं था। उन्होंने अपनी तीन बेटियों को पढ़ा-लिखाकर कामयाब बनाया, जिनमें से दो को उन्होंने अध्यापिका बनाया। उनकी पत्नी मीना गुप्ता का पहले ही निधन हो चुका था। इसके बाद वे काफी शांत रहने लग गए थे। उन्हें उम्मीद रहती थी कि शायद कभी बेटियां हाल- चाल पूछने के लिए फोन करें, लेकिन ऐसा न हुआ।

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बीमारी में भी रहा आंखों को अपनों का इंतजार
तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर वृद्धाश्रम प्रबंधन ने बेटियों को पिता की नाजुक हालत की जानकारी दी और उनसे मिलने का अनुरोध किया। लेकिन व्यस्तता और परिस्थितियों के कारण बेटियां नहीं आ सकीं। बीमारी के दौरान भी शिवचरण बार-बार यही पूछते रहे कि क्या उनकी बेटियों का कोई संदेश या कॉल आया है।

वीडियो कॉल से अंतिम विदाई, ऑनलाइन भेजे गए पैसे
शिवचरण ने मंगलवार सुबह अंतिम सांस ली। परिजनों के न पहुंच पाने के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई। श्मशान घाट में एक तरफ चिता जल रही थी, तो दूसरी तरफ मोबाइल की स्क्रीन पर वीडियो कॉल के जरिए बेटियों ने पिता को अंतिम विदाई दी। बड़ी बेटी ने अंतिम संस्कार के खर्च के लिए ₹5,100 ऑनलाइन ट्रांसफर किए और आश्रम से ही अस्थियों का गंगा विसर्जन कराने का आग्रह किया।

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जाते-जाते दे गए महादान का संदेश
शिवचरण की मौत के बाद उनके परिजनों की सहमति से उनका नेत्रदान कराया गया है। अपनी जिंदगी के अंतिम दिनों में जो अपनों को देखने के लिए तरस गई, अब वहीं आंखें किसी और को नया जीवन दान देंगी।

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