Edited By Rohini Oberoi,Updated: 09 Aug, 2026 01:52 PM

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) जब भी किसी क्षेत्र के लिए येलो (Yellow), ऑरेंज (Orange) या रेड (Red) अलर्ट जारी करता है तो इसका मकसद केवल यह बताना नहीं होता कि कितनी बारिश होगी या पारा कितना चढ़ेगा। ये रंग-कोड वाली चेतावनियां दरअसल यह दर्शाती हैं कि...
नई दिल्ली : भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) जब भी किसी क्षेत्र के लिए येलो (Yellow), ऑरेंज (Orange) या रेड (Red) अलर्ट जारी करता है तो इसका मकसद केवल यह बताना नहीं होता कि कितनी बारिश होगी या पारा कितना चढ़ेगा। ये रंग-कोड वाली चेतावनियां दरअसल यह दर्शाती हैं कि मौसम की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है और उससे सामान्य जनजीवन व प्रशासन को कितना खतरा है।
मौसम विभाग अलर्ट का स्तर तय करने से पहले मौसम की घटना की संभावना और उससे होने वाले संभावित असर दोनों का बारीकी से विश्लेषण करता है। यही कारण है कि कभी-कभी एक जैसी बारिश वाले दो अलग-अलग इलाकों के लिए भिन्न-भिन्न अलर्ट जारी किए जाते हैं। IMD अलर्ट तय करने के लिए असर-आधारित पूर्वानुमान का तरीका अपनाता है। यानी यह देखा जाता है कि मौसम का मिजाज लोगों की दिनचर्या, यातायात और बुनियादी ढांचे को कितना प्रभावित करेगा।
सबसे पहले बात करेंगे Yellow Alert की, इसका अर्थ है 'सचेत रहें'। यह बताता है कि मौसम में बदलाव आ रहा है और लोगों को मौसम की पल-पल की जानकारी रखनी चाहिए। अब बारी आती है Orange Alert की, इसका अर्थ होता है 'तैयार रहें'। यह मौसम के अधिक बिगड़ने का संकेत है जिससे सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है और आपातकालीन तैयारियों की आवश्यकता होती है। अंत में बात करतें हैं Red Alert की, इसका अर्थ होता है 'कड़ा एक्शन लें'। यह अत्यंत गंभीर और जान-माल के खतरे वाली स्थिति को दर्शाता है जिसमें तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

बता दें कि मूसलाधार बारिश के लिए अलर्ट मुख्य रूप से 24 घंटे की अवधि में होने वाले पानी के भराव (मात्रा) पर निर्भर करता है:
येलो अलर्ट: 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक बारिश का अनुमान (निचले इलाकों में जलजमाव की संभावना)।
ऑरेंज अलर्ट: 115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक भारी बारिश का अनुमान (बाढ़ और यातायात ठप होने का खतरा)।
रेड अलर्ट: 204.5 मिमी से अधिक अत्यंत भारी बारिश (गंभीर बाढ़, भूस्खलन और बड़े नुकसान का अंदेशा)।

वहीं गर्मी के मौसम में केवल तापमान ही नहीं बल्कि गर्मी की अवधि और सामान्य तापमान से उसका अंतर भी देखा जाता है:
येलो अलर्ट: मैदानी इलाकों में तापमान 40°C से 43°C तक पहुंचने पर जारी होता है।
ऑरेंज अलर्ट: जब तापमान 43°C से 45°C के बीच रहे या भीषण गर्मी कई दिनों तक बनी रहने का अंदेशा हो।
रेड अलर्ट: तापमान 45°C के पार चला जाए या लंबे समय तक जानलेवा लू चले। ऐसी स्थिति में हीट स्ट्रोक का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।

समुद्री तूफानों के समय अलर्ट तय करने के लिए हवा की गति, समय और तटीय इलाकों में होने वाले संभावित नुकसान को मुख्य पैमाना बनाया जाता है:
येलो अलर्ट: तूफान के काफी पहले संभावित तेज हवाओं के प्रति सचेत करने के लिए।
ऑरेंज अलर्ट: हवा की रफ्तार बढ़ने और तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने की संभावना पर।
रेड अलर्ट: अत्यंत खतरनाक स्थिति जब विनाशकारी हवाएं, मूसलाधार बारिश और समुद्र में ऊंची तूफानी लहरें तट से टकराने वाली हों।