Union Budget 2026: रक्षा, परिवहन या राज्यों में कौन पाएगा सबसे बड़ा हिस्सा! जानें क्या कहते हैं पुराने बजट के आंकड़े?

Edited By Updated: 01 Feb, 2026 10:15 AM

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आज देश का ध्यान संसद पर टिका है, जहां वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे लोकसभा में बजट प्रस्तुत करेंगी। हर साल की तरह इस बार भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार किस सेक्टर पर सबसे...

नेशनल डेस्क: आज देश का ध्यान संसद पर टिका है, जहां वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे लोकसभा में बजट प्रस्तुत करेंगी। हर साल की तरह इस बार भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार किस सेक्टर पर सबसे ज्यादा खर्च करेगी। बजट की प्राथमिकताओं को समझने के लिए अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कई अहम बातें सामने आती हैं।

ब्याज भुगतान पर जाता है सबसे ज्यादा पैसा
सरकार का सबसे बड़ा खर्च किसी नई योजना या विकास कार्य पर नहीं, बल्कि पुराने कर्ज के ब्याज को चुकाने में होता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार के कुल खर्च का करीब 24 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ब्याज भुगतान में गया था। वित्त वर्ष 2026-27 में इसके बढ़कर लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब साफ है कि सरकार जब एक रुपया खर्च करती है, तो उसका लगभग चौथाई हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में चला जाता है, जिससे न तो नई संपत्ति बनती है और न ही रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।


रक्षा क्षेत्र पर सरकार की खास नजर
पिछले बजट में रक्षा क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता दी गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए डिफेंस सेक्टर को करीब 6.81 लाख करोड़ रुपये का बजट मिला था। देश की सुरक्षा जरूरतों और आधुनिक सैन्य उपकरणों की मांग को देखते हुए इस साल भी रक्षा बजट में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात के बीच सरकार सुरक्षा पर खर्च बढ़ा सकती है।


राज्यों को भी मिलता है बड़ा हिस्सा
केंद्रीय बजट का एक बड़ा भाग सीधे राज्यों को दिया जाता है। पुराने आंकड़े बताते हैं कि केंद्र द्वारा वसूले गए टैक्स और शुल्कों में से लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को ट्रांसफर किया जाता है। यह राशि राज्य सरकारों को प्रशासन चलाने, विकास योजनाएं लागू करने और स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाएं सुधारने के लिए दी जाती है।


इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन पर खर्च जारी रहने की उम्मीद
पिछले साल इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन क्षेत्र को करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये का आवंटन मिला था। इसमें सड़कों, हाइवे, परिवहन नेटवर्क और सड़क सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं शामिल थीं। सरकार के विकास एजेंडे को देखते हुए इस साल भी इस सेक्टर को अच्छा बजट मिलने की उम्मीद है, ताकि देश की कनेक्टिविटी मजबूत हो और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिल सके।


कुल मिलाकर क्या कहती है तस्वीर?
पुराने बजट आंकड़े बताते हैं कि ब्याज भुगतान, रक्षा, राज्यों को मिलने वाला हिस्सा और इंफ्रास्ट्रक्चर ये चार क्षेत्र हमेशा सरकार के खर्च में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। अब देखना होगा कि बजट 2026-27 में सरकार किस सेक्टर पर सबसे ज्यादा जोर देती है और किन क्षेत्रों को नई प्राथमिकता मिलती है।

 

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