Edited By Sahil Kumar,Updated: 28 Jan, 2026 05:30 PM

यूनियन बजट 2026 की घोषणा के करीब, आम लोगों और उद्योगों की उम्मीदें बढ़ रही हैं। सरकार मेक इन इंडिया और बचत बढ़ाने पर फोकस कर सकती है। भारत में बने मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सस्ते घर और हेल्थ इंश्योरेंस सस्ते हो सकते हैं, जबकि विदेशी लग्जरी आइटम,...
नेशनल डेस्कः जैसे-जैसे यूनियन बजट 2026 की घोषणा करीब आ रही है, टैक्सपेयर्स और उद्योग जगत की नजरें सरकार की घोषणाओं पर टिकी हुई हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि इस बार क्या सस्ता होगा और क्या महंगा, और आम आदमी की खरीदने की क्षमता पर इसका क्या असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार मेक इन इंडिया और आम आदमी की बचत को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे सकती है।
बाजार में क्या सस्ता हो सकता है?
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स:
सरकार मोबाइल फोन के पुर्जों जैसे कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले और चार्जर पर कस्टम ड्यूटी कम कर सकती है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि भारत में बने स्मार्टफोन और टैबलेट सस्ते हो सकते हैं।
सस्ते घर (Affordable Housing):
होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट (Section 24b) को बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा सकता है। इससे घर खरीदना और किफायती हो जाएगा।
दवाइयां और मेडिकल उपकरण:
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं और लाइफ-सेविंग मेडिकल डिवाइसेस पर ड्यूटी कम होने की संभावना है।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV):
लिथियम-आयन बैटरी के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर टैक्स घट सकता है। इसका असर यह होगा कि इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर सस्ते हो सकते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस:
बीमा प्रीमियम पर 18% GST को कम करने की मांग जोर पकड़ रही है। अगर इसे घटाया गया, तो हेल्थ पॉलिसी खरीदना सस्ता हो जाएगा।
क्या महंगा हो सकता है?
इंपोर्टेड लग्जरी आइटम:
विदेशी घड़ियां, प्रीमियम कार और महंगे जूते-कपड़े महंगे हो सकते हैं, क्योंकि सरकार लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इन पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा सकती है।
तंबाकू और सिगरेट:
जैसा कि हर बजट में होता है, इस बार भी तंबाकू उत्पादों पर टैक्स (NCCD) बढ़ने की संभावना है।
विदेशी कॉस्मेटिक्स:
प्रीमियम ब्यूटी प्रोडक्ट और परफ्यूम्स पर भी टैक्स बढ़ सकता है।
आम आदमी की जेब पर असर
सिर्फ सामान की कीमत ही नहीं, बल्कि खरीदने की शक्ति भी बढ़ सकती है। चर्चा है कि आयकर की ‘जीरो टैक्स’ सीमा 12 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये की जा सकती है। साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है।