Union Budget Traditions History: अंग्रेजों के जमाने की वो 5 रस्में, जिन्हें मोदी सरकार ने बजट से कर दिया 'आउट'

Edited By Updated: 29 Jan, 2026 05:50 PM

5 colonial budget traditions abolished by modi government

देश में 1 फरवरी को बजट पेश किया जाने वाला है। ऐसे में आम जनता को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार 9वीं बार बजट पेश करेंगी। पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने बजट से जुड़ी कई ऐसी सदियों पुरानी परंपराओं को खत्म...

Budget 2026: देश में 1 फरवरी को बजट पेश किया जाने वाला है। ऐसे में आम जनता को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार 9वीं बार बजट पेश करेंगी। पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने बजट से जुड़ी कई ऐसी सदियों पुरानी परंपराओं को खत्म किया है, जो ब्रिटिश शासन के समय से चली आ रही थीं। आइए जानते हैं उन 5 बड़े बदलावों के बारे में जिन्होंने बजट की पूरी प्रक्रिया को सरल और 'देसी' बना दिया है:

1. ब्रीफकेस हुआ रिटायर, आया 'बहीखाता'

दशकों तक वित्त मंत्री बजट के दस्तावेज एक चमड़े के ब्रीफकेस में लेकर संसद पहुंचते थे। साल 2019 में निर्मला सीतारमण ने इस विदेशी परंपरा को तोड़ते हुए लाल कपड़े में लिपटा 'बहीखाता' पेश किया। यह भारतीय व्यापारियों और संस्कृति की पुरानी पद्धति का सम्मान था। अब यह परंपरा 'पेपरलेस बजट' के रूप में टैबलेट तक पहुंच गई है।

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2. रेल बजट का हुआ विलय

साल 1924 से चली आ रही 92 साल पुरानी परंपरा को 2017 में खत्म कर दिया गया। पहले रेल बजट अलग से पेश होता था, लेकिन अब इसे Union Budget में मिला दिया गया है। इससे रेलवे के विकास कार्यों के लिए फंड आवंटन और प्रशासनिक तालमेल बेहतर हुआ है।

3. तारीख में बड़ा फेरबदल

पहले बजट फरवरी की आखिरी तारीख (28 या 29 फरवरी) को पेश होता था, जिससे नए वित्त वर्ष (1 अप्रैल) तक फंड मिलने में देरी होती थी। सरकार ने 2017 में इसे 1 फरवरी कर दिया। इस एक महीने के अंतर से अब मंत्रालयों को समय पर बजट मिल जाता है और योजनाएं जमीनी स्तर पर जल्द शुरू हो पाती हैं।

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4. पूरी तरह 'डिजिटल' हुआ बजट

कोरोना काल (2021) के बाद से बजट दस्तावेजों की छपाई बंद कर दी गई। अब ट्रक भरकर कागज नहीं आते, बल्कि बजट 'पेपरलेस' हो गया है। सांसदों और जनता के लिए 'यूनियन बजट मोबाइल ऐप' लॉन्च किया गया, जिसने बजट को आम आदमी की जेब (स्मार्टफोन) तक पहुंचा दिया।

5. शाम 5 बजे का समय अब पुरानी बात

ब्रिटिश काल में बजट शाम 5 बजे पेश होता था ताकि लंदन में लोग इसे सुबह के समय सुन सकें। हालांकि यह बदलाव अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 2001 में किया था, लेकिन पिछले दशक में सुबह 11 बजे बजट पेश करने की इस परंपरा ने भारतीय कामकाज की संस्कृति को मजबूती दी है।

 

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