Edited By Mansa Devi,Updated: 29 Jan, 2026 06:11 PM

हर साल बजट वाले दिन एक तस्वीर देशभर में सबसे ज्यादा चर्चा में रहती थी। संसद की सीढ़ियों पर खड़े वित्त मंत्री और उनके हाथ में एक लाल रंग का ब्रीफकेस। कैमरों की फ्लैश लाइट, गंभीर चेहरा और वही लाल बैग यह दृश्य सालों तक बजट की पहचान बना रहा।
नेशनल डेस्क: हर साल बजट वाले दिन एक तस्वीर देशभर में सबसे ज्यादा चर्चा में रहती थी। संसद की सीढ़ियों पर खड़े वित्त मंत्री और उनके हाथ में एक लाल रंग का ब्रीफकेस। कैमरों की फ्लैश लाइट, गंभीर चेहरा और वही लाल बैग यह दृश्य सालों तक बजट की पहचान बना रहा। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बजट के साथ लाल रंग का यह रिश्ता आखिर शुरू कहां से हुआ और इसके पीछे क्या सोच थी। इस साल भी 1 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा। आइए जानते हैं बजट और लाल रंग के पीछे की पूरी कहानी।
ब्रिटिश शासन से जुड़ी है कहानी
भारत में बजट के साथ लाल रंग की परंपरा सीधे ब्रिटिश शासन से जुड़ी हुई है। ब्रिटेन में सरकारी, कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों को सदियों से लाल रंग के कवर में रखा जाता रहा है। वहां लाल रंग को सत्ता, अधिकार और गंभीर फैसलों का प्रतीक माना जाता था। जब अंग्रेजों ने भारत में प्रशासनिक व्यवस्था बनाई, तो उन्होंने बजट जैसे अहम आर्थिक दस्तावेजों के लिए भी इसी परंपरा को अपनाया। यही वजह है कि बजट की फाइल या ब्रीफकेस का रंग लाल रखा गया।
भारत में पहली बार कब पेश हुआ बजट?
भारत का पहला बजट साल 1860 में पेश किया गया था। उस समय देश पूरी तरह ब्रिटिश शासन के अधीन था और प्रशासनिक नियम अंग्रेजों के अनुसार चलते थे। उसी दौर से बजट को लाल कवर या लाल ब्रीफकेस में रखने की परंपरा शुरू हुई। आजादी के बाद भी यह परंपरा दशकों तक जारी रही और लाल ब्रीफकेस धीरे-धीरे बजट की स्थायी पहचान बन गया।
लाल रंग क्यों माना गया खास?
बजट में लाल रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं चुना गया था। इसे जिम्मेदारी, शक्ति और गंभीरता का प्रतीक माना जाता है। बजट एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसमें देश की आय, खर्च, टैक्स नीति, योजनाएं और आर्थिक दिशा तय की जाती है। लाल रंग यह संदेश देता था कि यह फाइल बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें लिए गए फैसले पूरे देश के भविष्य को प्रभावित करेंगे।
आम जनता के मन में कैसे बनी पहचान?
समय के साथ लाल ब्रीफकेस सिर्फ एक सरकारी परंपरा नहीं रहा, बल्कि आम लोगों के लिए बजट का संकेत बन गया। जैसे ही टीवी स्क्रीन पर वित्त मंत्री के हाथ में लाल फाइल दिखती थी, लोगों को समझ आ जाता था कि बजट आने वाला है। यह रंग बजट से इतना जुड़ गया कि बिना लाल ब्रीफकेस के बजट की कल्पना करना भी लोगों को अजीब लगने लगा।
साल 2019 में टूटी सदियों पुरानी परंपरा
साल 2019 में पहली बार बजट के साथ जुड़ी यह पुरानी परंपरा बदली। वित्त मंत्री ने लाल ब्रीफकेस की जगह लाल रंग के एक साधारण फोल्डर में बजट दस्तावेज पेश किया। इसे औपनिवेशिक दौर की परंपराओं से बाहर निकलने का संकेत माना गया। सरकार का संदेश साफ था देश अब अपने प्रतीकों और नीतियों को नए नजरिए से देख रहा है।
परंपरा बदली, लेकिन इतिहास आज भी जिंदा
हालांकि अब बजट लाल ब्रीफकेस में पेश नहीं होता, लेकिन बजट और लाल रंग का इतिहास आज भी लोगों की यादों में जिंदा है। यह रंग उस दौर की कहानी बताता है, जब बजट सिर्फ एक आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सत्ता और शासन का प्रतीक हुआ करता था। इसीलिए आज भी जब बजट की बात होती है, तो लाल रंग अपने आप चर्चा में आ जाता है और लोगों की जिज्ञासा बढ़ जाती है।