महिला आरक्षण बिल गिरने पर कांग्रेस का बड़ा हमला, बोली- BJP का Event Management फ्लॉप हुआ

Edited By Updated: 18 Apr, 2026 03:54 PM

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लोकसभा में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' के गिरने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा इस गंभीर मुद्दे को केवल एक 'इवेंट' की...

नेशनल डेस्क: लोकसभा में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' के गिरने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा इस गंभीर मुद्दे को केवल एक 'इवेंट' की तरह पेश कर रही थी, जो पूरी तरह विफल रहा।

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 इमरान मसूद बोले-

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा, "मैंने कल ही कह दिया था कि ये लोग कुछ नहीं करना चाहते। इनके लिए यह सिर्फ एक 'इवेंट मैनेजमेंट' था, जो अब फ्लॉप हो चुका है। हमें पहले से पता था कि यही नतीजा होगा।" RSS द्वारा महिला आरक्षण का समर्थन किए जाने पर मसूद ने कहा, "आरक्षण का विचार संघ का नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का सपना था। जब 1996 में यह बिल आया था, तब यही लोग इसका विरोध कर रहे थे। आज वे इसे अपना विचार बताकर श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।"

2029 चुनाव के लिए तत्काल कदम उठाए सरकार: के.सी. वेणुगोपाल

कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है। उन्होंने मांग की कि सरकार को बिना किसी देरी के 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए आरक्षण लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

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प्रमोद तिवारी ने भी किया तीखा प्रहार

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने बिल गिरने को लोकतंत्र की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा, "कल के घटनाक्रम से भारत का संविधान और लोकतंत्र सुरक्षित हुआ है। भाजपा भारत के राजनीतिक मानचित्र (Political Map) के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही थी, जिसे विपक्षी एकजुटता ने रोक दिया।"

बिल गिरने का कारण

17 अप्रैल को विशेष सत्र के दौरान इस विधेयक पर मतदान हुआ था।

समर्थन में वोट: 298

विरोध में वोट: 230

हालांकि बिल पर सरकार के पास साधारण बहुमत था, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई (Special Majority) वोट नहीं मिल सके। विपक्ष का मुख्य विरोध बिल को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने पर था। उनका मानना है कि इन शर्तों के कारण महिलाओं को आरक्षण मिलने में कई सालों की देरी हो सकती है।

 

 

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