महिला आरक्षण संबंधी विधेयक सांसदों को नहीं दिया जाना बुलडोजर मानसिकता: कांग्रेस

Edited By Updated: 14 Apr, 2026 04:35 PM

congress calls withholding women s reservation bill copies bulldozer mentality

कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि संसद की तीन दिवसीय बैठक शुरू होने से दो दिन पहले तक महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित विधेयकों की प्रतियां सांसदों को साझा नहीं किया जाना 'लोकतंत्र का मजाक' बनाना तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि संसद की तीन दिवसीय बैठक शुरू होने से दो दिन पहले तक महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित विधेयकों की प्रतियां सांसदों को साझा नहीं किया जाना 'लोकतंत्र का मजाक' बनाना तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ''बुलडोजर मानसिकता'' का परिचायक है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की हालिया टिप्पणी को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा कि ''जो कभी अपने आप को 'नॉन-बायलॉजिकल' मानते थे, वह अब कह रहे हैं कि गृहस्थ नहीं हैं।'' संसद के बजट सत्र से तहत दोनों सदनों की तीन दिवसीय बैठक 16, 17 और 18 अप्रैल को होगी। सरकार इस दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयक लाने की तैयारी में है। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "संसद का विशेष सत्र परसों, 16 अप्रैल से शुरू होगा, वह भी उस समय जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। 
 

मोदी सरकार ने चुनाव खत्म होने के बाद (आज से पंद्रह दिन बाद) सर्वदलीय बैठक बुलाने की विपक्ष की बिल्कुल सही और जायज़ मांग को खारिज कर दिया है।" उन्होंने कहा, "आज सुबह तक भी मोदी सरकार ने सांसदों के साथ उन संविधान संशोधन विधेयकों को साझा नहीं किया है, जिन पर उन्हें चर्चा और मतदान करना है। यह लोकतंत्र का पूरी तरह मजाक उड़ाने जैसा है और प्रधानमंत्री की बुलडोजर मानसिकता को दिखाता है, जो कभी खुद को नॉन- बायलॉजिकल बताते थे और अब कहते हैं कि वे गृहस्थ नहीं हैं।"

 प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को एक महिला सम्मेलन में कहा था कि वित्तीय सशक्तीकरण ने महिलाओं को परिवार में अधिक अधिकार दिये हैं, जिन्हें परंपरागत रूप से हाशिए पर रखा गया था। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा था कि भले ही वह ''गृहस्थ" नहीं हैं, लेकिन इससे पूरी तरह अवगत हैं। लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक मणिकम टैगोर ने भी तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के बीच संसद का ''विशेष सत्र'' आयोजित करने को लेकर सरकार की आलोचना की। 

टैगोर ने कहा, ''चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की उचित मांग खारिज कर दी गई है। अब भी, सांसदों को संविधान संशोधन विधेयक की प्रति नहीं दी गई है। यह लोकतंत्र नहीं है। यह बुलडोजर शासन है।'' उन्होंने कहा, ''कांग्रेस पार्टी हमेशा महिला आरक्षण के लिए मजबूती से खड़ी रही है, यह पारित और तय हो चुका है। लेकिन परिसीमन कहीं अधिक संवेदनशील प्रक्रिया है जिसके लिए व्यापक परामर्श, आम सहमति और पारदर्शिता की आवश्यकता है।'' टैगोर ने दावा किया, ''इसके बजाय हम जो देख रहे हैं वह यह है कि चीजों को गोपनीय रखा जा रहा है और खारिज किया जा रहा है। 

पिछड़े वर्ग की 150 से अधिक महिलाओं को प्रतिनिधित्व से वंचित किया जा रहा है, जो उचित जातिगत डेटा और उचित प्रक्रिया का पालन किए जाने से लोकसभा में प्रवेश कर सकती थीं।'' उन्होंने कहा, ''संसद कोई रबर स्टांप नहीं है। यह लोगों की आवाज की नींव है। इसे कमजोर करना भारत के विचार को कमजोर करता है।'' मुख्य विपक्षी दल निरंतर यह आरोप लगा रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में फायदा हासिल करने के मकसद से यह कदम उठा रही है। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने सोमवार को एक लेख में कहा था कि महिला आरक्षण असल मुद्दा नहीं है, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन मुद्दा है क्योंकि यह खतरनाक और संविधान पर हमला है। 

 

 

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