पारस हेल्थ की "उम्मीद के सितारे" पहल ने कैंसर सर्वाइवर्स के साहस और उम्मीद को किया सलाम

Edited By Updated: 19 May, 2026 09:47 PM

paras health s umeed ke sitare initiative salutes the courage and hope

भारत में तेजी से बढ़ते कैंसर मामलों के बीच हेल्थकेयर सेक्टर में अब इलाज के साथ-साथ मरीजों की मानसिक और भावनात्मक देखभाल पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Paras Health ने गुरुग्राम, हरियाणा में अपनी प्रमुख पहल ‘उम्मीद...

(वेब डेस्क): भारत में तेजी से बढ़ते कैंसर मामलों के बीच हेल्थकेयर सेक्टर में अब इलाज के साथ-साथ मरीजों की मानसिक और भावनात्मक देखभाल पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Paras Health ने गुरुग्राम, हरियाणा में अपनी प्रमुख पहल ‘उम्मीद के सितारे’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम कैंसर सर्वाइवर्स, डॉक्टरों, केयरगिवर्स, ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों और हेल्थकेयर टीमों को समर्पित था, जहां कैंसर से जंग जीत चुके लोगों के साहस, संघर्ष और जिजीविषा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सर्वाइवर्स का सम्मान करना नहीं था, बल्कि समाज में यह संदेश देना भी था कि कैंसर का इलाज केवल दवाइयों और अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों को भावनात्मक सहारा, मानसिक मजबूती और परिवार के सहयोग की भी उतनी ही जरूरत होती है।

‘उम्मीद के सितारे’ पहल पारस हेल्थ के व्यापक कैंपेन का हिस्सा है, जिसे कैंसर मरीजों और सर्वाइवर्स को प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम में कई कैंसर सर्वाइवर्स ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इलाज के दौरान उन्होंने किस तरह दर्द, डर, अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना किया। कई लोगों ने कहा कि परिवार, डॉक्टरों और केयरगिवर्स का साथ उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने इन कहानियों को बेहद भावुकता और प्रेरणा के साथ सुना। आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि कैंसर से लड़ाई सिर्फ शारीरिक नहीं होती, बल्कि यह मानसिक और सामाजिक संघर्ष भी होती है, जिसमें मरीज को हर स्तर पर समर्थन की जरूरत होती है।

कार्यक्रम में भारत में लगातार बढ़ रहे कैंसर मामलों पर चिंता जताते हुए कहा गया कि अब हेल्थकेयर सिस्टम को पारंपरिक इलाज मॉडल से आगे बढ़कर होलिस्टिक और पेशेंट-सेंट्रिक अप्रोच अपनानी होगी। शुरुआती जांच, समय पर इलाज, प्रिसीजन-लेड डायग्नोसिस और मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रीटमेंट आधुनिक कैंसर केयर के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं। इसके साथ ही इमोशनल वेलबीइंग, काउंसलिंग, रिहैबिलिटेशन और लॉन्ग-टर्म सर्वाइवर सपोर्ट को भी उतना ही महत्व देना जरूरी है। यह भी कहा गया कि अगर मरीज को इलाज के दौरान सही भावनात्मक माहौल और सकारात्मक सहयोग मिले तो उसकी रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

पारस हेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. धर्मिंदर नागर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में बढ़ता कैंसर बोझ हेल्थकेयर संस्थानों के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की ऑन्कोलॉजी प्रिसीजन-बेस्ड और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट पाथवे्स पर आधारित होगी, जहां हर मरीज के लिए उसकी जरूरत के अनुसार इलाज तय किया जाएगा। डॉ. नागर ने बताया कि पारस हेल्थ ने सर्जिकल, मेडिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी को जोड़ते हुए एक मजबूत मल्टीडिसिप्लिनरी ऑन्कोलॉजी इकोसिस्टम तैयार किया है, जो आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सहायता से मरीजों को बेहतर इलाज प्रदान कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्लिनिकल एक्सीलेंस ही पर्याप्त नहीं है, क्योंकि हर कैंसर मरीज की यात्रा बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक होती है।

और ये भी पढ़े

    उन्होंने कहा कि ‘उम्मीद के सितारे’ जैसी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज खुद को अकेला महसूस न करें और इलाज के हर चरण—डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट, रिकवरी और रिहैबिलिटेशन—में उन्हें पूरा सहयोग मिले। उनके अनुसार, असली healing केवल बीमारी खत्म होने तक सीमित नहीं होती, बल्कि मरीजों का आत्मविश्वास लौटाना, उन्हें सम्मान और उम्मीद के साथ जिंदगी जीने के लिए प्रेरित करना भी उतना ही जरूरी है। डॉ. नागर ने कहा कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में कंपैशन और एम्पैथी की भूमिका उतनी ही अहम है जितनी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की।

    वहीं पारस हेल्थ के ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर विनीत अग्रवाल ने कहा कि भारत में तेजी से बढ़ रहे कैंसर मामलों को देखते हुए हेल्थकेयर सिस्टम को अब कन्वेंशनल ट्रीटमेंट मॉडल्स से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि आज ऑन्कोलॉजी केयर का मतलब सिर्फ बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को इस कठिन दौर से आत्मविश्वास, सम्मान और सहारे के साथ बाहर निकालना भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक हेल्थकेयर में कंपैशनेट कंटिन्यूइटी ऑफ केयर यानी मरीज को लगातार मानवीय सहयोग और भावनात्मक समर्थन देना बेहद जरूरी हो गया है।

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू सर्वाइवरशिप पर फोकस करना भी रहा। इसमें बताया गया कि कैंसर से ठीक हो जाने के बाद भी कई सर्वाइवर्स लंबे समय तक इमोशनल ट्रॉमा, फाइनेंशियल प्रेशर, लाइफस्टाइल चेंजेस और सोशल रीइंटीग्रेशन जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे में समाज और हेल्थकेयर संस्थानों की जिम्मेदारी केवल इलाज तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि उन्हें सर्वाइवर्स के पुनर्वास और मानसिक मजबूती के लिए भी काम करना चाहिए। ‘उम्मीद के सितारे’ जैसी पहलें कैंसर सर्वाइवर्स को एक ऐसा मंच देती हैं जहां वे अपनी कहानियां साझा कर सकें, खुद को सम्मानित महसूस कर सकें और दूसरों को भी प्रेरित कर सकें।

    यह आयोजन भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में हो रहे उस बड़े बदलाव को भी दर्शाता है, जहां अब एम्पैथी-ड्रिवन हेल्थकेयर को लगातार महत्व दिया जा रहा है। जैसे-जैसे कैंसर इलाज तकनीकी रूप से अधिक उन्नत होता जा रहा है, वैसे-वैसे यह समझ भी मजबूत हो रही है कि मरीजों को केवल मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं, बल्कि इमोशनल काउंसलिंग, रिहैबिलिटेशन सपोर्ट, न्यूट्रिशनल गाइडेंस और कम्युनिटी केयर की भी जरूरत होती है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सही इलाज, मजबूत इच्छाशक्ति, परिवार के सहयोग और सकारात्मक माहौल के साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी लड़ाई जीती जा सकती है।

    ‘उम्मीद के सितारे’ पहल के जरिए पारस हेल्थ ने न केवल कैंसर सर्वाइवर्स के साहस और संघर्ष को सम्मानित किया, बल्कि समाज में यह मजबूत संदेश भी दिया कि कैंसर जिंदगी बदल सकता है, लेकिन उम्मीद, हिम्मत और सही सहयोग के सामने यह बीमारी इंसान की पहचान नहीं बन सकती।

    Related Story

      img title
      img title

      Be on the top of everything happening around the world.

      Try Premium Service.

      Subscribe Now!