CBSE बोर्ड परीक्षा में पेपर सैट को लेकर छिड़ा विवाद, भेदभाव के खिलाफ कोर्ट पहुंचे अध्यापक

Edited By Updated: 24 Feb, 2026 10:07 AM

cbse board exam

: देशभर में चल रही सी.बी.एस.ई. बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है,

लुधियाना (विक्की): देशभर में चल रही सी.बी.एस.ई. बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों के 'डिफिकल्टी लैवल' (कठिनाई का स्तर) में भारी अंतर होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इस मामले में एक अध्यापक प्रशांत किराड ने सी.बी.एस.ई. के खिलाफ जनहित याचिका (पी.आई.एल.) दायर कर दी है। उनका आरोप है कि अलग-अलग रीजन के क्वैश्चन पेपर का लेवल एक जैसा नहीं रखा गया जिससे विद्यार्थियों के साथ सरेआम भेदभाव हो रहा है और उनके अंक अब मेहनत के बजाय किस्मत पर टिक गए हैं। देश-विदेश के केंद्रों पर करीब 43 लाख से अधिक विद्यार्थी 17 फरवरी से शुरू हुई बोर्ड परीक्षाओं में बैठ रहे हैं।

बता दें कि विवाद की शुरुआत 10वीं के मैथ्स के पेपर से हुई, जो अब 12वीं के फिजिक्स पेपर तक पहुंच गई है। याचिकाकर्त्ता का दावा है कि बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों से 'आई.आई.टी.-जे.ई.ई.' मेन और एडवांस्ड लेवल के कठिन सवाल पूछे जा रहे हैं। कुछ सैट्स बहुत आसान हैं, जबकि कुछ इतने मुश्किल हैं कि उन्हें हल करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं जैसी गहरी जानकारी चाहिए। उन्होंने बोर्ड से सवाल किया है कि बिना कठिनाई का स्तर जांचे इतने सारे सेट बनाने की क्या जरूरत थी?

एक ही विषय, पर पन्नों की संख्या में बड़ा अंतर
परीक्षा
 तंत्र की कार्यप्रणाली पर तब और सवाल उठे जब 10वीं मैथ्स बेसिक के 2 अलग-अलग सैट्स में पन्नों की संख्या में भारी अंतर देखा गया। एक तरफ सैट-1 में जहां केवल 15 पेज थे, वहीं सेट-2 में 27 पेज का क्वैश्चन पेपर थमाया गया। हालांकि दोनों में सवालों की संख्या 38 ही थी लेकिन 12 पन्नों के इस बड़े अंतर ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को मानसिक दबाव में डाल दिया है। आरोप है कि कुछ पेपर सीधे तौर पर 'एन.सी.ई.आर.टी.' सिलेबस से बाहर के थे जिससे पूरे परीक्षा तंत्र की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है।

नॉर्मलाइजेशन और ग्रेस मार्क्स की उठी मांग
विवाद
 बढ़ता देख अध्यापक ने मांग की है कि जिस तरह जे.ई.ई. मेन एग्जाम की अलग-अलग शिफ्ट्स के लिए 'नॉर्मलाइजेशन' प्रक्रिया अपनाई जाती है, वैसी ही व्यवस्था बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू हो ताकि सभी को समान अवसर मिले। याचिका में मांग की गई है कि सी.बी.एस.ई. इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे और जिन विद्यार्थियों को कठिन सेट मिले हैं, उनके लिए 'ग्रेस मार्क्स' की घोषणा की जाए या फिर टीचर्स को उत्तर पुस्तिकाओं की चैकिंग (मार्किंग) में ढील देने के निर्देश दिए जाएं। अभिभावकों का कहना है कि अगर मूल्यांकन उदारता से नहीं हुआ, तो यह बच्चों के भविष्य और अगली कक्षाओं के एडमिशन पर बुरा असर डालेगा।

सी.बी.एस.ई. प्रश्न पत्रों के बदलते स्वरूप पर अध्यापकों और अभिभावकों की राय
"सी.बी.एस.ई. द्वारा प्रश्नपत्रों के डिफिकल्टी लैवल (कठिनाई स्तर) में सुधार करना एक अच्छा कदम है। पिछले कुछ वर्षों से पेपर काफी आसान आ रहे थे, जिससे 90% अंक आना एक आम बात हो गई थी और इन अंकों की वैल्यू कम होने लगी थी। कई बार विद्यार्थी आसान पेपर के चलते पढ़ाई को हल्के में लेने लगते थे। अब केवल वही बच्चे पूरा पेपर हल कर पाएंगे जिनके कॉन्सैप्ट क्लीयर हैं और जिन्होंने अच्छी तरह पढ़ाई की है।"
- तेजप्रीत सिंह, अध्यापक

"बोर्ड परीक्षाओं का स्तर बढ़ना विद्यार्थियों के हक में है। इससे उन्हें भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं (कॉम्पीटिटिव एग्जाम्स) जैसे 'जे.ई.ई.' और 'नीट' के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिलेगी। अगर बोर्ड के पेपर का लैवल ऊंचा नहीं होगा, तो विद्यार्थी आगे चलकर बड़े कम्पटीशन का सामना नहीं कर पाएंगे।"
- रमनदीप सिंह, अभिभावक

"कई प्रश्न सीधे 'एन.सी.ई.आर.टी.' सिलेबस से बाहर के लग रहे हैं। अगर पेपर इतना कठिन रखना है तो चेकिंग में ढील दी जानी चाहिए या ग्रेस मार्क्स मिलने चाहिएं ताकि बच्चों का भविष्य खराब न हो।"
- अमनदीप कौर, अध्यापिका

"जब प्रश्नपत्र चुनौतीपूर्ण होते हैं, तभी कड़ी मेहनत करने वाले और औसत विद्यार्थी के बीच का अंतर पता चलता है। आसान पेपरों के कारण टैलेंटेड बच्चों की मेहनत छिप जाती थी क्योंकि सभी को एक जैसे नंबर मिल जाते थे। अब सही मायने में काबिल विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का फल मिलेगा और मेरिट की वैल्यू बढ़ेगी।"
- नवजोत कौर, अभिभावक

"सी.बी.एस.ई. अब 'रट्टा' सिस्टम को खत्म कर 'एप्लीकेशन बेस्ड' सवालों पर जोर दे रहा है। प्रश्न पत्रों को थोड़ा मुश्किल बनाना यह दिखाता है कि बोर्ड बच्चों में सोचने और समझने की शक्ति (क्रिटिकल थिंकिंग) बढ़ाना चाहता है। यह बदलाव इंटरनैशनल एजुकेशन लैवल के साथ तालमेल बैठाने के लिए बहुत जरूरी है।"
- संदीप शर्मा, अभिभावक

"पढ़ाई का मतलब सिर्फ नंबर लाना नहीं, बल्कि विषय की गहरी जानकारी होना है। सी.बी.एस.ई. की इस सख्ती से अब स्कूलों और अध्यापकों को भी विद्यार्थियों की नींव (बेसिक्स) मजबूत करने पर ज्यादा मेहनत करनी होगी। इससे शिक्षा की क्वालिटी बेहतर होगी और भविष्य में देश को होनहार प्रोफैशनल्स मिलेंगे।"
- सिमरनजीत कौर, अध्यापिका

"बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षा में अंतर होता है। पेपर में आई.आई.टी. लैवल के सवाल पूछना बच्चों पर बेवजह मानसिक दबाव डालना है। अलग-अलग सैट्स के लैवल में अंतर होना सरासर भेदभाव है।"
- विशाल खन्ना, अभिभावक

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